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Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार पंचायत चुनाव पर आयोग का डिजिटल डंडा, अब रिकॉर्ड में होगी हर प्रक्रिया; रिजर्वेशन डेटा होगा ऑनलाइन

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव 2026 को पारदर्शी बनाने के लिए दावा-आपत्ति निपटारे, अपील प्रक्रिया और आरक्षण डेटा डिजिटाइजेशन को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं।

Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार पंचायत चुनाव पर आयोग का डिजिटल डंडा, अब रिकॉर्ड में  होगी हर प्रक्रिया; रिजर्वेशन डेटा होगा ऑनलाइन
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Panchayat Election 2026 : राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने शनिवार को ‘प्रपत्र-1’ यानी प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या के प्रकाशन के बाद दावा-आपत्ति निपटारे और आरक्षण संबंधी डेटा के डिजिटाइजेशन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर स्तर पर सुनवाई, अपील और डिजिटल रिकॉर्डिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी।


आयोग के अनुसार, दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 मई निर्धारित की गई है। इसके बाद प्राप्त सभी आपत्तियों का निपटारा 22 मई तक किया जाएगा। आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक दावा या आपत्ति पर विधिवत सुनवाई होगी और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सुनवाई के बाद संबंधित अधिकारी को लिखित आदेश जारी करना होगा और उसकी प्रति संबंधित पक्ष को उपलब्ध करानी होगी।


यदि कोई पक्ष सुनवाई के बाद दिए गए निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे आदेश पारित होने के तीन दिनों के भीतर अपील दायर करने का अधिकार होगा। आयोग ने अपीलों के निष्पादन के लिए भी सात दिनों की समय सीमा निर्धारित की है ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो सके।


निर्वाचन आयोग ने ‘प्रपत्र-1’ के अंतिम प्रकाशन की तिथि 15 जून तय की है। इसके बाद 20 जून तक संबंधित जिलों में जिला गजट के माध्यम से प्रकाशन किया जाएगा। साथ ही 23 जून तक इसकी प्रति आयोग को उपलब्ध करानी होगी। आयोग ने कहा है कि समयबद्ध तरीके से सभी चरणों को पूरा करना अनिवार्य होगा।


इस बार पंचायत चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। आयोग ने बताया कि आरक्षित श्रेणियों से संबंधित डेटा पहले से पोर्टल पर उपलब्ध है। अब सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे 30 मई 2026 तक आरक्षण श्रेणियों की डिजिटल प्रविष्टि आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। इसके साथ ही आयोग द्वारा अनुमोदित आरक्षण संबंधी पीडीएफ कॉपी भी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।


डिजिटल प्रक्रिया को सुचारु रूप से लागू करने के लिए जिला स्तर के अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आयोग का मानना है कि डिजिटाइजेशन से डेटा प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों की संभावना कम होगी।


आयोग ने दावा-आपत्ति निपटारे के लिए अपीलीय व्यवस्था भी स्पष्ट कर दी है। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति सदस्य पद के मामलों में प्रखंड विकास पदाधिकारी को प्राधिकृत पदाधिकारी बनाया गया है। इन मामलों में अनुमंडल पदाधिकारी प्रथम अपीलीय पदाधिकारी होंगे, जबकि जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिला पदाधिकारी द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी की भूमिका निभाएंगे।


वहीं जिला परिषद सदस्य पद से जुड़े मामलों में अनुमंडल पदाधिकारी को प्राधिकृत पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी को अपीलीय प्राधिकारी बनाया गया है। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले को पंचायत चुनाव प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।