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Bihar NH Projects : 26 हाईवे प्रोजेक्ट पर संकट! इस डेट तक मंजूरी नहीं तो सब रद्द, केंद्र की बड़ी चेतावनी

बिहार में 26 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं वन विभाग की शर्तों के कारण अटक गई हैं। केंद्र सरकार ने 31 मई तक मंजूरी नहीं मिलने पर इन्हें रद्द करने की चेतावनी दी है, जिससे पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी संकट में हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 28, 2026, 9:15:15 AM

Bihar NH Projects : 26 हाईवे प्रोजेक्ट पर संकट! इस डेट तक मंजूरी नहीं तो सब रद्द, केंद्र की बड़ी चेतावनी

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Bihar NH Projects : बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) से जुड़ी 26 अहम परियोजनाएं इस समय गंभीर संकट में फंसी हुई हैं। इन परियोजनाओं पर काम इसलिए अटक गया है क्योंकि वन विभाग की एक शर्त को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि 31 मई तक इन परियोजनाओं के लिए वन भूमि उपयोग की मंजूरी नहीं मिली, तो इन्हें रद्द किया जा सकता है।


दरअसल, इन सभी परियोजनाओं के लिए कुल 711.92 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है। इनमें कई महत्वपूर्ण और बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनमें पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। अधिकतर परियोजनाओं को वर्ष 2023 के बाद मंजूरी मिली थी, जिससे राज्य के बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद थी।


जानकारी के मुताबिक, 19 मार्च को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने बिहार में चल रही एनएच परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान यह बात सामने आई कि राज्य का वन विभाग सड़क निर्माण के लिए वन भूमि के उपयोग की अनुमति देने में बाधा बन रहा है। जबकि केंद्र के पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से इस संबंध में पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।


केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए राज्यों को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन बिहार में वन विभाग के कुछ अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की अलग तरीके से व्याख्या करते हुए यह शर्त लागू कर दी कि वन भूमि के बदले गैर-वन भूमि उपलब्ध करानी होगी। यही शर्त अब पूरे विवाद की जड़ बन गई है।


केंद्रीय मंत्रालय का कहना है कि अन्य सभी राज्यों में उसके निर्देशों का पालन किया जा रहा है, लेकिन बिहार में अलग रुख अपनाया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि पर सड़क निर्माण होने के बाद भी उस जमीन की श्रेणी वन भूमि ही बनी रहती है। यदि निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई होती है, तो उसी क्षेत्र में पौधारोपण कर इसकी भरपाई की जाती है और इसके लिए एजेंसियों से शुल्क भी लिया जाता है।


वन विभाग के नोडल अधिकारी से मिली जानकारी के बाद केंद्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो-टूक कहा है कि यदि समय सीमा के भीतर मंजूरी नहीं मिली, तो सभी स्वीकृत परियोजनाओं को रद्द या नामंजूर कर दिया जाएगा।


केंद्र की नाराजगी के बाद बिहार के वन विभाग ने 25 मार्च को एक नया आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि फिलहाल वन भूमि के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट कोई अलग आदेश देता है, तो निर्माण एजेंसियों को गैर-वन भूमि उपलब्ध करानी होगी। हालांकि, इस नई शर्त पर भी केंद्र सरकार ने असहमति जताई है और कहा है कि कोई राज्य केंद्र पर इस तरह की शर्तें नहीं थोप सकता।


इन अटकी हुई परियोजनाओं में कई महत्वपूर्ण सड़क और एक्सप्रेसवे शामिल हैं, जैसे बरबीघा-शेखपुरा-जमुई-झाझा-बांका मार्ग, वाराणसी-कोलकाता कॉरिडोर, भागलपुर-खैरा मार्ग, दरभंगा-बनवारी पट्टी, आरा-सासाराम-पटना सड़क, मोहनियां-चौसा, मेहरौना घाट-सीवान और पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे समेत कई अन्य परियोजनाएं।


यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो बिहार के सड़क नेटवर्क के विस्तार और विकास पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।