1st Bihar Published by: First Bihar Updated Oct 17, 2025, 8:24:23 AM
प्रतीकात्मक - फ़ोटो Google
Bihar News: बिहार सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के सभी 38 जिलों में एक-एक गांव को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की योजना पर काम तेज हो गया है। बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने इसकी जिम्मेदारी संभाली है और सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर गांवों के चयन के लिए निर्देश दिए हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री मुफ्त सूर्य घर योजना को ग्रामीण स्तर पर लागू करना और सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। BREDA के निदेशक ने जिलाधिकारियों से प्राथमिकता के आधार पर गांवों की सूची जल्द उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि कार्यान्वयन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो सके।
योजना के तहत गांवों का चयन सात निर्धारित मानदंडों पर आधारित होगा जो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों से प्रेरित हैं। इनमें सबसे प्रमुख है गांव की आबादी 5,000 से अधिक होना, ताकि योजना का प्रभाव व्यापक हो। अन्य मानदंडों में गांव की राजस्व सीमा के भीतर स्थापित वितरित सौर ऊर्जा क्षमता, सौर पैनल स्थापना की संभावना, ग्रामीण बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरणीय अनुकूलता शामिल हैं।
प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा जो चयन प्रक्रिया को संचालित करेगी। चयन के लिए जिलास्तरीय प्रतियोगिता भी आयोजित होगी, जिसमें गांवों का मूल्यांकन सौर ऊर्जा उपयोग की क्षमता के आधार पर होगा। BREDA ने स्पष्ट किया है कि चयनित गांवों में सौर स्ट्रीट लाइट, रूफटॉप सोलर सिस्टम, सोलर वाटर पंप और सामुदायिक सौर मॉड्यूल स्थापित किए जाएंगे जो गांव की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करेंगे।
यह योजना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के प्रसार को गति देगी, जहां वर्तमान में बिजली की अनियमित आपूर्ति एक बड़ी समस्या है। PM Surya Ghar Yojana के तहत केंद्र सरकार 3 किलोवॉट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर 60% तक सब्सिडी दे रही है, जिसमें बिहार में BREDA अतिरिक्त राज्य-स्तरीय सहायता प्रदान करेगी।
इससे न केवल बिजली बिल में कमी आएगी, बल्कि रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण भी होगा। सुपौल जिले के एक पायलट गांव में पहले ही 50% घरों में सौर लाइट स्थापित हो चुकी हैं। जिलाधिकारियों को 15 दिनों के भीतर सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है और चयन के बाद कार्यान्वयन 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।