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Bihar News: बिहार के इन शहरों में हाइजेनिक मीट विक्रय केंद्र खोलने की तैयारी, सरकार देगी इतने ₹लाख की मदद

Bihar News: बिहार में पटना, दानापुर सहित 11 शहरों में हाइजेनिक मीट विक्रय केंद्र खुलेंगे। एक केंद्र पर 12 लाख खर्च, सरकार 50% (6 लाख तक) अनुदान देगी..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार में मांस की बिक्री को स्वच्छ और मानकयुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की योजना के तहत अब हाइजेनिक मीट विक्रय केंद्र खोले जाएंगे और खुले व अस्वच्छ तरीके से मांस बेचने की प्रथा खत्म होगी। इसकी शुरुआत पटना नगर निगम क्षेत्र और दानापुर से होगी, जहां कुल 20 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद योजना को राज्य के अन्य 9 शहरी और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में विस्तार दिया जाएगा, कुल 11 शहरों को कवर करते हुए। इस योजना के लिए विभाग ने 1.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।


एक हाइजेनिक मीट विक्रय केंद्र स्थापित करने में करीब 12 लाख रुपये का खर्च आएगा। सरकार 50 प्रतिशत का अनुदान देगी, यानी लाभार्थी को अधिकतम 6 लाख रुपये तक सब्सिडी मिलेगी। बाकी राशि लाभार्थी या चयनित एजेंसी को वहन करनी होगी। केंद्रों में डीप फ्रीजर, कोल्ड स्टोरेज, वॉश बेसिन, वजन मापने की मशीन, बिलिंग सिस्टम, ठोस अपशिष्ट निस्तारण और ड्रेनेज की व्यवस्था अनिवार्य होगी। साथ ही हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। जिला पशुपालन पदाधिकारी इन केंद्रों के निरीक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे।


केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए पशुपालन निदेशालय एजेंसी का चयन करेगा। चयनित एजेंसी को जमीन या दुकान की व्यवस्था करनी होगी, जिसे लीज पर लिया जा सकता है। रख-रखाव और दैनिक खर्च भी एजेंसी उठाएगी। कर्मचारियों को मीट प्रसंस्करण, खाद्य सुरक्षा मानक, पैकेजिंग, पशु वध नियम, मार्केटिंग, उपभोक्ता सेवा और डिजिटल भुगतान का प्रशिक्षण दिया जाएगा। केंद्र खुलने के बाद एजेंसी को निदेशालय को सूचना देनी होगी।


यह योजना न केवल मांस बिक्री को हाइजेनिक बनाएगी, बल्कि उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। खुले में मांस बेचने से होने वाले संक्रमण और प्रदूषण की समस्या कम होगी। बिहार जैसे राज्य में जहां मांस की खपत ज्यादा है, यह कदम स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के मानकों को ऊंचा उठाएगा। योजना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों तक भी फायदा पहुंच सकता है। इच्छुक एजेंसियां या लाभार्थी विभाग से संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं।