Bihar News : बिहार को मिला नया राज्यपाल, इस दिन सैयद अता हसनैन ले सकते हैं शपथ; शुरू हुई तैयारी

बिहार को जल्द नया राज्यपाल मिल सकता है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन 13 मार्च को पटना में बिहार के राज्यपाल पद की शपथ ले सकते हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 07, 2026, 11:32:40 AM

Bihar News : बिहार को मिला नया राज्यपाल, इस दिन सैयद अता हसनैन ले सकते हैं शपथ; शुरू हुई तैयारी

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Bihar News : बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ी हलचल की चर्चा तेज हो गई है। राज्य को जल्द ही नया राज्यपाल मिल गया है। बताया जा रहा है कि रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन 12 मार्च को पटना पहुंच सकते हैं और 13 मार्च को औपचारिक रूप से बिहार के नए राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण कर सकते हैं। इस संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


मौजूदा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह अब सैयद अता हसनैन को बिहार की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। राजभवन में होने वाला यह बदलाव राज्य की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। यह जानकारी सामने आ रही है कि अगले कुछ दिनों में इस बदलाव की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।


जानकारी के अनुसार, 12 मार्च को पटना पहुंचने के बाद सैयद अता हसनैन राजभवन में जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करेंगे। इसके बाद 13 मार्च को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। परंपरा के मुताबिक नए राज्यपाल को पद और गोपनीयता की शपथ पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। फिलहाल पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू हैं और संभावना है कि वही नए राज्यपाल को शपथ दिलाएंगे।


राजभवन में होने वाला शपथ ग्रहण समारोह काफी अहम माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी, न्यायपालिका के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रह सकते हैं। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी समारोह में आमंत्रित किया जा सकता है। राजभवन में होने वाला यह कार्यक्रम राज्य के प्रशासनिक और संवैधानिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।


रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। सेना में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे कश्मीर घाटी में 15 कॉर्प्स के कमांडर भी रह चुके हैं और सुरक्षा व रणनीतिक मामलों में उनकी गहरी समझ मानी जाती है। अपने सैन्य अनुभव और नेतृत्व क्षमता के कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर भी एक सम्मानित नाम रहे हैं।


सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सैयद अता हसनैन विभिन्न रणनीतिक और सुरक्षा मामलों पर सक्रिय रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। वे कई थिंक टैंक और नीति से जुड़े मंचों पर भी अपनी भागीदारी देते रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया जाता है तो यह उनके सार्वजनिक जीवन की एक नई प्रशासनिक पारी की शुरुआत मानी जाएगी।


बिहार जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में राज्यपाल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। राज्यपाल न केवल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, बल्कि कई संवैधानिक प्रक्रियाओं में उनकी अहम भूमिका होती है। विधानसभा से जुड़े मामलों से लेकर सरकार गठन की परिस्थितियों तक, कई मौकों पर राज्यपाल के फैसले महत्वपूर्ण माने जाते हैं।


इसी वजह से नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में भी इस बदलाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है।


फिलहाल सबकी निगाहें 12 और 13 मार्च पर टिकी हुई हैं, जब पटना के राजभवन में एक नई संवैधानिक शुरुआत की तस्वीर सामने आ सकती है। अगर तय कार्यक्रम के अनुसार सब कुछ होता है, तो बिहार को जल्द ही नया राज्यपाल मिल जाएगा और राजभवन में एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत होगी।