Bihar weather: बिहार के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। इस बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून राज्य में तय समय पर पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 13 से 15 जून के बीच मॉनसून बिहार में प्रवेश कर सकता है। पहले इसके 3-4 दिन देर से आने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब मौसम की अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए समय पर आगमन की संभावना मजबूत हो गई है।
मौसम विभाग ने बताया कि मॉनसून पूर्वोत्तर भारत के शेष हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। पूरे सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों तक इसकी पहुंच हो गई है। अगले चार से पांच दिनों के दौरान इसके मध्य अरब सागर और पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों के साथ बिहार के कुछ क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार में मॉनसून का प्रवेश आमतौर पर सीमांचल क्षेत्र के किशनगंज और पूर्णिया जिले के रास्ते होता है। वहां से धीरे-धीरे यह पूरे राज्य में फैलता है। यदि वर्तमान परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो 20 जून के बाद बिहार के अधिकांश जिलों में व्यापक मॉनसूनी बारिश शुरू हो सकती है।
हालांकि मॉनसून के समय पर आने की संभावना के बीच एक चिंता भी बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष भी राज्य में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह लगातार पांचवां वर्ष होगा जब बिहार में औसत से कम वर्षा दर्ज की जाएगी।
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनंद शंकर के अनुसार इस वर्ष मॉनसून सीजन के दौरान अल-नीनो प्रभाव विकसित होने की प्रबल संभावना है। अल-नीनो एक ऐसी जलवायु परिस्थिति है, जिसके कारण भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा और अधिक गर्मी देखने को मिलती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी वजह से इस साल भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रह सकता है।
डॉ. शंकर ने बताया कि जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध में हिम आवरण सामान्य से कुछ कम दर्ज किया गया है। इसका असर भी मॉनसून की गतिविधियों पर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल-नीनो के प्रभाव के कारण लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है, भले ही मॉनसून समय पर पहुंच जाए।
अगर पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 बिहार के लिए अपेक्षाकृत बेहतर रहा था। उस वर्ष सामान्य 1017.2 मिलीमीटर के मुकाबले 1044.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन इसके बाद बारिश का ग्राफ लगातार नीचे जाता रहा। वर्ष 2022 में केवल 683.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 992.2 मिलीमीटर था। वर्ष 2023 में 760.5 मिलीमीटर, 2024 में 798.3 मिलीमीटर और 2025 में 686.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से काफी कम थी।
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल मॉनसून की प्रगति संतोषजनक बनी हुई है। यदि इसकी रफ्तार में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता है तो बिहार के लोगों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अगले कुछ दिनों में सीमांचल क्षेत्र में मॉनसून की पहली बारिश देखने को मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है। समय पर मॉनसून आने से किसानों को राहत मिलेगी, हालांकि कम बारिश की आशंका को देखते हुए जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।
कुल मिलाकर, बिहार में मॉनसून के समय पर पहुंचने की संभावना ने भीषण गर्मी से परेशान लोगों को राहत की उम्मीद दी है। अब सभी की निगाहें 13 से 15 जून के बीच मॉनसून की पहली दस्तक पर टिकी हैं।





