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बिहार में विधायक जी के दामाद ने कोर्ट में जज को दिखाई धौंस: रसूख इतना कि DM ने अदालत का आदेश नहीं माना

सासाराम में विधायक के दामाद ने अदालत में जज पर धौंस जमाई, जुर्माना लगने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। डीएम द्वारा कोर्ट आदेश की अवहेलना पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

बिहार में विधायक जी के दामाद ने कोर्ट में जज को दिखाई धौंस: रसूख इतना कि DM ने अदालत का आदेश नहीं माना
Tejpratap
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SASARAM: बिहार में एक रसूखदार विधायक के दामाद की अकड़ देखिए. सरकारी नौकरी कर रहे दामाद जी ने कोर्ट में जज को ही हड़का दिया. जज पर अपने ससुर की धौंस जमाई. नाराज अदालत ने उस पर जुर्माना लगाया लेकिन सरकारी तंत्र विधायक जी के दामाद के वेतन से पैसा काटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. नाराज कोर्ट ने डीएम के खिलाफ कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट को लिखने की चेतावनी दी है.


सासाराम में हुआ वाकया

ये वाकया सासाराम के जिला व्यवहार न्यायालय में हुआ है.यहां न्यायालय ने सरकारी कार्य में लापरवाही के साथ साथ अदालत में अमर्यादित व्यवहार के लिए जिलाधिकारी के ऑफिस में तैनात विधि प्रशाखा पदाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है. लेकिन उसने जुर्माना भरने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने जिलाधिकारी को कहा कि वे उस पदाधिकारी के वेतन से पैसे काटकर कोर्ट में जमा कराएं लेकिन दामाद जी का रसूख ऐसा है कि कोर्ट के इस आदेश को नहीं माना गया.


इस मामले की सुनवाई कर रही एडीजे चार अनिल कुमार की अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा है कि विधि प्रशाखा पदाधिकारी  ने खुद को एक रसूख वाले विधायक का दामाद बताकर धौंस जमाने की कोशिश की.


पूरा मामला जानिए


दरअसल, सासाराम जिला न्यायालय के एडीजे 3 अनिल कुमार की अदालत ने मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम से जुड़े एक मामले आदेश पारित किया था. इस मामले में जिलाधिकारी को कोर्ट के निर्देश के मुताबिक आदेश पारित कर पेश करना था. लेकिन कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया. नाराज अदालत ने जिलाधिकारी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया.


विधि प्रशाखा पदाधिकारी ने की गड़बड़ी

बाद में मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पिछली तारीख पर समाहर्ता रोहतास द्वारा स्थगन आदेश पेश न कर पाने के पीछे असली लापरवाही समाहर्ता की नहीं, बल्कि उनके कार्यालय में तैनात विधि प्रशाखा पदाधिकारी की थी.


इसके बाद कोर्ट ने अपना पिछला आदेश बदलते हुए समाहर्ता पर लगाए गए 10 हजार रुपये के जुर्माने को खत्म कर दिया और वही जुर्माना सीधे विधि पदाधिकारी पर लगा दिया. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया कि यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से काटकर न्यायालय में जमा कराई जाए.


कोर्ट में दिखाई बाहुबली वाली अकड़, जज को हड़काया


सासाराम की कोर्ट ने अपने आदेश में खास तौर पर ये उल्लेख किया है कि मामले की सुनवाई के दौरान विधि प्रशाखा पदाधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय कोर्ट में बेहद अहंकार दिखाया। उन्होंने खुद को एक विधायक का दामाद बताया और न्यायिक प्रक्रिया पर धौंस जमाने का प्रयास किया.


डीएम ने वेतन से नहीं काटी राशि

विधायक जी के दामाद का रुतबा ऐसा है कि कोर्ट के कई बार के आदेश के बावजूद जिलाधिकारी ने विधि प्रशाखा पदाधिकारी के वेतन से जुर्माने की राशि नहीं काटी. नाराज कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा माना है। अदालत ने कहा कि स्थगन आदेश लाने के लिए पहले ही 60 दिन से अधिक का पर्याप्त समय दिया जा चुका है।


डीएम से मांगा जवाब


सासाराम कोर्ट ने रोहतास के डीएम को कहा है कि वे सात दिनों के भीतर यह जवाब दें कि उन्होंने अभी तक अधिकारी के वेतन से जुर्माने की राशि क्यों नहीं काटी. जिलाधिकारी का जवाब संतोषजनक न होने पर न्यायालय ने मामले को पटना हाई कोर्ट में अवमानना की कार्यवाही के लिए भेजने की चेतावनी दी गई है.


हाईकोर्ट पहुंचे दामाद जी

उधर, विधायक के दामाद ने सासाराम कोर्ट को ही पार्टी बनाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने तर्क दिया है कि जब कोर्ट स्वयं एक पक्ष बन गया है, तो वह इस मामले का ट्रायल नहीं कर सकता.

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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