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बड़ी खबर: सुरक्षा में कटौती से नाराज लालू परिवार, राबड़ी देवी ने सरकार को लौटाई सुरक्षा

बिहार में सुरक्षा कटौती को लेकर सियासत गरमा गई है। राबड़ी देवी ने सरकारी सुरक्षा लौटाई, राजद ने कहा- सभी नेता सुरक्षा छोड़कर जनता के बीच रहेंगे।

Lalu family
Rabdi devi
© File photo
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar News: बिहार की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख Lalu Prasad Yadav और उनके परिवार की सुरक्षा में कथित कटौती को लेकर पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi ने अपनी सरकारी सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया है। राजद ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।


राजद नेताओं का कहना है कि सरकार ने विपक्ष के प्रमुख नेताओं की सुरक्षा में कमी कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी का आरोप है कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, ऐसे समय में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा घटाना उचित नहीं है। सुरक्षा में कटौती को लेकर राजद कार्यकर्ताओं और नेताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है।


राबड़ी देवी ने सरकार को अपनी सुरक्षा वापस लौटाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि सरकार सुरक्षा देने को लेकर राजनीति कर रही है तो उन्हें ऐसी सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। राबड़ी देवी के इस कदम को राजद ने राजनीतिक विरोध के रूप में प्रस्तुत किया है।


इस मुद्दे पर राजद के प्रवक्ताओं ने भी सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि यदि सरकार सुरक्षा के नाम पर भेदभाव कर रही है तो राजद के अन्य नेता भी अपनी सुरक्षा वापस करने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा, "हम जनता के बीच से निकले लोग हैं और जनता के बीच ही रहेंगे। यदि सरकार सुरक्षा कम करके दबाव बनाना चाहती है तो यह संभव नहीं है। राजद के सभी लोग अपनी सुरक्षा छोड़ने को तैयार हैं। हम जनता की सुरक्षा में ही रहेंगे।"


राजद का दावा है कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार विफल साबित हो रही है। ऐसे में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा कम करने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार को राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा कम करने के बजाय आम जनता की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।


दूसरी ओर, सरकार की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के आकलन के आधार पर की जाती है। सुरक्षा में किसी भी प्रकार का बदलाव निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा का यह मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है। विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच राजद इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना सकती है। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखने की कोशिश करेगा।


फिलहाल राबड़ी देवी द्वारा सुरक्षा लौटाने के फैसले ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजद के अन्य नेता भी सुरक्षा वापस करने का कदम उठाते हैं और सरकार इस पूरे विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुई यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।