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बिहार में ऑक्सीजन की कमी झेल रहे हैं तो इस मेल आईडी पर हाईकोर्ट से गुहार लगाइये, अब न्याय के मंदिर से ही आखिरी उम्मीद

PATNA : बिहार में ऑक्सीजन के लिए अगर सरकार से फऱियाद करके थक चुके हैं तो न्याय के मंदिर की घंटी बजाइये. हाईकोर्ट ने वह ईमेल आईडी जारी कर दिया जिस पर मेल कर आप ये बता सकते हैं

बिहार में ऑक्सीजन की कमी झेल रहे हैं तो इस मेल आईडी पर हाईकोर्ट से गुहार लगाइये, अब न्याय के मंदिर से ही आखिरी उम्मीद
First Bihar
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PATNA : बिहार में ऑक्सीजन के लिए अगर सरकार से फऱियाद करके थक चुके हैं तो न्याय के मंदिर की घंटी बजाइये. हाईकोर्ट ने वह ईमेल आईडी जारी कर दिया जिस पर मेल कर आप ये बता सकते हैं कि ऑक्सीजन की कैसी किल्लत झेलनी पड रही है. बिहार सरकार के दावों से नाराज हाईकोर्ट ने दो दिन पहले ही ये निर्देश दिया था कि ऐसा ईमेल आईडी जारी की जाये जिस पर अस्पताल ये फऱियाद लगा सकें कि उन्हें ऑक्सीजन की किल्लत झेलनी पड़ रही है.


हाईकोर्ट का ईमेल आईडी जारी
दरअसल पटना हाईकोर्ट कोरोना की भीषण त्रासदी में लोगों को हो रही परेशानी पर सुनवाई कर रहा है. पिछले शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने दावा किया था कि बिहार में ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है. लेकिन कोर्ट उस दावे से संतुष्ट नहीं हुआ. कोर्ट ने रेजिस्ट्रार जनरल को ये निर्देश दिया था कि वे एक ऐसा ईमेल आईडी बनायें जिसमें अस्पताल अपनी शिकायत भेज सकें. जिस अस्पताल को ऑक्सीजन की किल्लत हो वह सीधे कोर्ट से गुहार लगा सके.


ये है ईमेल आईडी
रविवार की शाम बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में नोटिस जारी किया है. पढिये क्या है उसका मजमून “माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा CWIC No. 353 of 2021 में दिनांक 23.04 2021 को पारित न्यायादेश के आलोक में वैसे निजी अस्पताल जिन्हें  कोविड-19 मरीजों के उपचार हेतु अनुमति दी गई है. उनके द्वारा कोविड-19 संक्रमित मरीजों का उपचार किया जा रहा है और उन्हें ऑक्सीजन की आपूर्ति में कठिनाई हो तो ये विद्वान रजिस्ट्रार जनरल, पटना हाई कोर्ट को निम्नलिखित ई-मेल पर अपनी शिकायत सकते हैं. rgphccovidcomplain@gmail.com


हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगायी
दरअसल पटना हाईकोर्ट में जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ बिहार में कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिलने के मामले की सुनवाई कर रही है. शुक्रवार को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी कार्ययोजना पेश की औऱ दावा किया कि बिहार में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी जायेगी. राज्य सरकार के दावों पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि ऑक्सीजन की कमी के कारण सूबे के अस्पतालों में मरीज भर्ती नहीं किये जा रहे हैं. वहीं, राज्य सरकार ये दावा कर रही है कि ऑक्सीजन की कोई कमी ही नहीं है.


सरकार के दावों से नाराज खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को हाईकोर्ट की एक ईमेल आईडी बनाने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि इस मेल आई डी को पूरे बिहार में प्रचारित कराया जाये. जिस किसी हॉस्पीटल को ऑक्सीजन की किल्लत हो वह सीधे हाईकोर्ट के मेल भेजे. कोर्ट की ओर से संबंधित जिलाधिकारी से बात कर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने को कहा जायेगा.  


कोर्ट में शुक्रवार को राज्य सरकार ने कोरोना के इलाज के लिए ऑक्सीजन से लेकर बेड तक की कार्ययोजना पेश की थी. हाई कोर्ट ने सरकार की कार्य योजना पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि बिहार में जिस रफ्तार से कोरोना फैल रहा है उसकी तुलना में सरकार की कोशिशें नाकाफी हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार में हेल्थ सर्विसेज के डायरेक्टर जेनेरल को दो दिनों के अंदर मेडिकल एक्सपर्ट की टीम बनाने का निर्देश दिया था. मेडिकल एक्सपर्ट की इस टीम का नेतृत्व डिप्टी डायरेक्टर जेनेरल या उससे उपर के अधिकारी करेंगे. केंद्र सरकार की ये टीम बिहार में कोरोना के कहर औऱ उसके इलाज के लिए राज्य सरकार की व्यवस्था का आकलन करेगी और फिर हाईकोर्ट को रिपोर्ट करेगी. इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगी.


पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सूबे में कोरोना के इलाज के लिए स्थिति सुधारने का निर्देश देते हुए मामले की फिर सुनवाई करने का फैसला लिया है. मामले पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होने वाली है.

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