Bihar MDM News : अब बच्चों के खाने पर होगी सीधी निगरानी, तीन साल तक बनेगा रिपोर्ट कार्ड; शिक्षा विभाग का सख्त फैसला

बिहार सरकार ने मध्याह्न भोजन (MDM) की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 38 जिलों में संचालित 100 से अधिक सेंट्रलाइज्ड किचन की जांच अब ADRI करेगी। तीन साल तक चलने वाले इस निरीक्षण में भोजन की गुणवत्ता, पोषण मानक, स्वच्छता और वितरण व्

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 23 Feb 2026 08:32:34 AM IST

Bihar MDM News : अब बच्चों के खाने पर होगी सीधी निगरानी, तीन साल तक बनेगा रिपोर्ट कार्ड; शिक्षा विभाग का सख्त फैसला

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Bihar MDM News : बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कभी भोजन की गुणवत्ता पर, तो कभी स्वच्छता और वितरण व्यवस्था पर शिकायतें सामने आती रही हैं। अब इन शिकायतों पर प्रभावी रोक लगाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य भर में संचालित सेंट्रलाइज्ड किचन की स्वतंत्र जांच प्रतिष्ठित संस्था Asian Development Research Institute (आद्री) द्वारा कराई जाएगी।


इस संबंध में शिक्षा विभाग के एमडीएम निदेशालय और आद्री के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस करार के तहत अगले तीन वर्षों तक आद्री की टीम बिहार के सभी 38 जिलों में संचालित 100 से अधिक केंद्रीकृत रसोई घरों का औचक निरीक्षण करेगी और उनकी कार्यप्रणाली के आधार पर विस्तृत ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार करेगी।


तीन साल तक चलेगा व्यापक मूल्यांकन

समझौते के अनुसार, आद्री की विशेषज्ञ टीम भोजन की गुणवत्ता, पोषण मानकों, साफ-सफाई, खाद्य भंडारण, खाना पकाने की प्रक्रिया और वितरण व्यवस्था का गहन मूल्यांकन करेगी। निरीक्षण केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति से डेटा संग्रह और विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।


राज्य के लगभग 100 केंद्रीकृत किचन, जो विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGO) द्वारा संचालित हैं, इस जांच के दायरे में आएंगे। इसके अलावा, करीब 5 प्रतिशत स्कूलों का चयन रैंडम आधार पर किया जाएगा, जहां यह परखा जाएगा कि किचन से निकलने वाला भोजन बच्चों तक पहुंचते-पहुंचते अपनी गुणवत्ता और पोषण स्तर बरकरार रखता है या नहीं।


रेटिंग सिस्टम से तय होगा एनजीओ का भविष्य

इस मूल्यांकन की सबसे अहम बात यह है कि आद्री द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर संबंधित एनजीओ को रेटिंग दी जाएगी। यह रेटिंग ‘बेहतरीन’ से लेकर ‘बेहद खराब’ तक हो सकती है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि खराब प्रदर्शन करने वाले एनजीओ को पहले सुधार का अवसर दिया जाएगा।


यदि निर्धारित समय के भीतर सुधार नहीं होता है, तो उनका अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाली संस्थाओं के अनुबंध को आगे बढ़ाया जाएगा और उन्हें प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है। इस कदम से एमडीएम व्यवस्था में जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ने की उम्मीद है।


बच्चों और शिक्षकों से लिया जाएगा फीडबैक

यह मूल्यांकन प्रक्रिया केवल किचन निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी। आद्री की टीम उन स्कूलों का भी दौरा करेगी जहां यह भोजन भेजा जाता है। वहां बच्चों, शिक्षकों और रसोइयों से सीधे बातचीत कर भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, स्वाद और समय पर उपलब्धता के बारे में फीडबैक लिया जाएगा।


इस पहल का उद्देश्य जमीनी हकीकत को समझना है, ताकि केवल कागजी रिपोर्ट के बजाय वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्णय लिए जा सकें। कई बार किचन में गुणवत्ता ठीक रहती है, लेकिन वितरण के दौरान लापरवाही से समस्या उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में स्कूल स्तर पर निगरानी बेहद जरूरी मानी जा रही है।


गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि पोषण योजनाओं की सफलता के लिए सतत निगरानी और फीडबैक तंत्र बेहद आवश्यक है।


सरकार इस कदम को बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़कर देख रही है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह न केवल बिहार में बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, और आद्री द्वारा किया जाने वाला यह मूल्यांकन उसी दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।