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Bihar Mafia Property: बिहार में माफिया की अवैध संपत्तियों पर गृह विभाग की नजर, 1600 की हुई पहचान; 400 मामलों की जानकारी कोर्ट को सौंपी

Bihar Mafia Property: बिहार में माफियाओं की अवैध संपत्ति जब्ती का अभियान तेज़ हो गया है। राज्य सरकार ने 1600 माफियाओं की पहचान की है, जिनमें से 400 की संपत्तियों का ब्योरा न्यायालय को सौंपा जा चुका है।

Bihar Mafia Property
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Mafia Property: बिहार में माफियाओं की संपत्ति जब्ती का अभियान लगातार तेज़ होता जा रहा है। राज्य सरकार ने अब तक करीब 1600 ऐसे माफियाओं की पहचान की है, जिन्होंने अपराध से अर्जित धन के बल पर राज्य के भीतर और बाहर बड़े पैमाने पर अवैध संपत्तियां खड़ी की हैं। संपत्तियों को पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इस कार्रवाई में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ जुटी हुई हैं।


गृह विभाग के अनुसार, अब तक लगभग 400 माफियाओं की संपत्ति से संबंधित जानकारी सामूहिक प्रयासों के तहत संबंधित न्यायालयों को सौंपी जा चुकी है। जांच में सामने आया है कि माफियाओं ने बालू, जमीन, शराब समेत अन्य आपराधिक गतिविधियों के जरिए अवैध संपत्तियां अर्जित की हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए इन संपत्तियों का पंजीकरण अक्सर रिश्तेदारों के नाम पर कराया गया है।


संपत्ति की पहचान के लिए बिहार पुलिस राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से रिपोर्ट एकत्र कर रही है। जमीन, फ्लैट और अन्य अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री तथा दाखिल-खारिज से जुड़ी जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार और निबंधन विभाग से ली जा रही है, जबकि वाहनों की खरीद से संबंधित आंकड़े परिवहन विभाग से जुटाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भी मदद ली जा रही है।


डबल इंजन सरकार का लाभ इस अभियान में साफ नजर आ रहा है। केंद्र सरकार से जुड़ी एजेंसियां—आयकर विभाग, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी राज्य एजेंसियों को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध करा रही हैं। संदिग्ध व्यक्तियों के आधार, पैन कार्ड, आयकर रिटर्न, बैंक खातों समेत अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आयकर रिटर्न में संपत्तियों का विवरण नहीं देने वालों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जा रही है। बेनामी संपत्तियों की पहचान होने पर उनके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। राजनीतिक व्यक्तियों के मामलों में शपथ पत्र में दिए गए विवरण को आधार बनाया जा रहा है।


जांच में सामने आई संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए अलग टीम का गठन किया गया है, जिसमें भवन निर्माण विभाग, राजस्व विभाग सहित अन्य विशेषज्ञ अधिकारी शामिल हैं। यह टीम एमवीआर अथवा बाजार मूल्य के आधार पर संपत्ति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे पुलिस के माध्यम से न्यायालय को सौंपा जाएगा। सभी अनुसंधान अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित प्रारूप में ही रिपोर्ट न्यायालय को भेजें।


जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कार्रवाई से बचने के लिए कई माफियाओं ने दूसरे राज्यों में भी संपत्तियां बना रखी हैं। ऐसी संपत्तियों के सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित जिले के डीएम और एसपी को सौंपी गई है। अनुसंधान से जुड़े अधिकारी एसडीपीओ और एसपी के माध्यम से डीएम को रिपोर्ट देंगे, जिसके आधार पर डीएम संबंधित राज्य के जिला पदाधिकारी से सत्यापन कराएंगे।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता