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Bihar land: बिहार में जमीन की कीमत तय करने का नया नियम, हर तीन साल में होगा भूमि सर्वे, जानें क्या बदलेगा

Bihar Land Survey 2026: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन में पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था लागू होगी। हर तीन साल में भूमि सर्वे कर श्रेणी और सर्किल रेट तय किए जाएंगे।

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Tejpratap
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Bihar land : बिहार में जमीन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था तैयार की है। अब राज्य के सभी जिलों में भूमि वर्गीकरण पंजी (Land Classification Register) बनाई जाएगी। इसके आधार पर जमीन की श्रेणी तय होगी और उसी के अनुसार सर्किल रेट निर्धारित किया जाएगा।


निबंधन विभाग के निर्देश के अनुसार, अंचल स्तर पर सर्वे कर जमीन की स्थिति और उपयोग के आधार पर उसका वर्गीकरण किया जाएगा। इस प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि भूमि वर्गीकरण पंजी की समीक्षा हर तीन साल में की जाएगी। समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि किसी इलाके में विकास कार्यों के कारण जमीन की श्रेणी में बदलाव हुआ है या नहीं।


अगर कोई ग्रामीण इलाका तेजी से विकसित होकर शहरी क्षेत्र के करीब पहुंचता है या किसी जमीन का उपयोग बदल जाता है तो सर्वे के बाद पंजी में सुधार किया जाएगा। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति के अनुसार मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी।


जमीन की श्रेणी के आधार पर तय होगा सर्किल रेट

सरकार ने जमीन को अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से श्रेणियों में बांटा है। इसमें शहरी क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र, मेट्रोपोलिटन क्षेत्र और शहर से सटे पेरिफेरल इलाके शामिल हैं।


ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन को सात श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें व्यावसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, मुख्य सड़क के किनारे की जमीन, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि और बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर जैसी जमीन शामिल हैं।


वहीं शहरी क्षेत्रों में जमीन की छह श्रेणियां बनाई गई हैं। इनमें प्रमुख सड़क और व्यावसायिक क्षेत्र की जमीन, मुख्य सड़क की जमीन, औद्योगिक भूमि, शाखा सड़क की जमीन, अन्य सड़क या गली की आवासीय भूमि और कृषि व गैर आवासीय भूमि शामिल हैं।


पटना मेट्रो क्षेत्र में हर साल हो सकता है बदलाव

पटना मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए यहां भूमि वर्गीकरण पंजी में हर साल सुधार किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि विकास के साथ जमीन की कीमत और उपयोग में बदलाव आता रहता है, इसलिए समय-समय पर अपडेट जरूरी है।


हालांकि विभाग ने साफ किया है कि यह भूमि वर्गीकरण पंजी केवल निबंधन विभाग की जरूरतों के लिए होगी। इसे खेसरा पंजी या जमीन के स्वामित्व दस्तावेज के रूप में नहीं माना जाएगा।


पेरिफेरल इलाकों में अलग होगा सर्किल रेट

शहर से सटे इलाकों यानी पेरिफेरल क्षेत्रों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है। यहां जमीन का सर्किल रेट ग्रामीण क्षेत्र से ज्यादा लेकिन शहरी क्षेत्र से कम रखा जाएगा। इसके लिए जिला मूल्यांकन समिति जमीन की स्थिति और विकास को ध्यान में रखते हुए दर तय करेगी।


अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत मूल्यांकन की शिकायतों में कमी आएगी। वर्ष 2029 में अगला बड़ा सर्वे प्रस्तावित है, जिसके आधार पर जमीन की श्रेणियों और दरों में बदलाव किया जा सकता है।


जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन मालिकों को अपनी जमीन की सही श्रेणी और बाजार मूल्य की जानकारी मिल सकेगी। इससे निबंधन के समय होने वाली परेशानियां कम होंगी। साथ ही सरकार को भी जमीन के मूल्यांकन और राजस्व संग्रह में मदद मिलेगी।


बिहार में तेजी से हो रहे शहरीकरण और विकास कार्यों के बीच यह कदम जमीन से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।