1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 25 Jan 2026 03:12:51 PM IST
- फ़ोटो
Kundan Krishnan : गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर केंद्र सरकार ने पुलिस, अग्निशमन सेवा, होमगार्ड, सिविल डिफेंस और सुधार सेवा से जुड़े कुल 982 कर्मियों को वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए पदकों से सम्मानित करने की घोषणा की है। इस सूची में बिहार राज्य के कई अधिकारी और जवान शामिल हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट सेवाओं का परिचय दिया। ऐसे में बिहार के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन को गैलेंट्री अवार्ड मिला है।इसके बाद अब सबके मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस अधिकारी ने ऐसा क्या कर दिया कि इन्हें गैलेंट्री अवार्ड मिला है। तो आइए इसकी पूरी कहानी हम आपको बताते हैं।
यह कहानी उस समय की है जिसे बिहार में आम तौर पर एनडीए के नेता और कुछ आमजन भी जंगलराज की संज्ञा देते हैं। इसी जंगलराज में एक ऐसी कहानी शुरू हुई थी। जिसमें एक जिले का जेल दो दिनों तक कैदियों के कब्जे में था और इस कब्जे को छुड़वाने के लिए एक बड़े ही दबंग SP ने अपनी जान की परवाह किए बगैर जमकर गोलियां चलाई। हालांकि, गोलियां दोनों तरफ से चलाई गई। इस मामले में 4 लोग मारे गए थे। तब जाकर सरकार का कब्ज़ा हुआ था।
यह कहानी दिनांक 28.03.2002 की सुबह का है। जब मंडल कारा, छपरा में बंद कैदियों ने अपने स्थानांतरण आदेश के विरोध में विद्रोह किया। उन्होंने जेल परिसर में हथियार और विस्फोटक इकठ्ठा किए तथा जेल के बाहर भी अपना नियंत्रण स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और जेल सुरक्षा में तैनात पुलिस तथा जेल कर्मचारियों पर हमला कर जेल पर कब्जा कर लिया। फलस्वरूप, मंडल कारा, छपरा 28 मार्च 2002 की सुबह से 30 मार्च 2002 तक उपद्रवी कैदियों के कब्जे में रहा।
राज्य सरकार के आदेश के आलोक में जिला प्रशासन ने 30.03.2002 को कारा पर पुनः कब्जा करने हेतु कार्रवाई प्रारंभ की। घटना की सूचना मिलते ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, सारण कुंदन कृष्णन ने साहस व क्षमता का परिचय देते हुए अपने नेतृत्व में दल बल के साथ जेल परिसर में जाकर स्थिति को नियंत्रण में लिया।
इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले एवं हथगोले का उपयोग किया। करीब 3-4 घंटे की कठिन लड़ाई के बाद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित किया। कार्रवाई के दौरान उपद्रवी कैदियों द्वारा उपयोग किए गए 33 चक्र 315 बोर और 12 बोर के खोखे तथा बम के अवशेष बरामद किए गए। पुलिस ने आत्मरक्षा में टी.जी.आर. सेल, टी.जी. हथगोले और कई चक्र गोलियाँ भी चलायीं, जिससे जेल में बंद हजारों कैदियों के भागने को रोका जा सका। इस अभियान में सारण जिला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री कुंदन कृष्णन के साथ जिला पुलिस/सैन्य पुलिस/गृह रक्षक सहित 28 जवान घायल हुए। साथ ही इस हिंसा में 4 कैदियों की मृत्यु एवं 7 कैदी घायल हुए।