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IAS Training Bihar : बिहार सरकार का बड़ा फैसला! 19 जिलों के DM समेत 38 IAS ट्रेनिंग पर भेजे गए, जारी हुआ आदेश

बिहार सरकार ने IAS अधिकारियों के लिए MCTP चरण-III प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। 38 अधिकारियों की सूची जारी की गई है और यह ट्रेनिंग प्रमोशन के लिए जरूरी मानी गई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 07, 2026, 10:40:53 AM

IAS Training Bihar : बिहार सरकार का बड़ा फैसला! 19 जिलों के DM समेत 38 IAS ट्रेनिंग पर भेजे गए, जारी हुआ आदेश

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IAS Training Bihar : बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के लिए अनिवार्य मध्य सेवाकालीन प्रशिक्षण (MCTP) चरण-III के 25वें बैच की घोषणा कर दी है। यह प्रशिक्षण 11 मई 2026 से 5 जून 2026 तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में आयोजित होगा। सरकार ने इसे अधिकारियों के करियर ग्रोथ और प्रमोशन से सीधे तौर पर जुड़ा बताया है।


सरकार के निर्देश के अनुसार, यह प्रशिक्षण सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रशासनिक क्षमता को निखारने का अहम मंच है। इसमें भाग लेने वाले अधिकारियों को नीतिगत समझ, नेतृत्व कौशल और बेहतर प्रशासनिक निर्णय लेने की ट्रेनिंग दी जाएगी। अधिकारियों को आधुनिक प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए इस कार्यक्रम को खास तौर पर डिजाइन किया गया है।


पात्रता के लिए तय किए गए सख्त मानदंड

इस बार प्रशिक्षण के लिए पात्रता तय करने में सख्ती बरती गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इसमें मुख्य रूप से 2018 बैच के अधिकारियों को पहला मौका दिया जाएगा, जबकि 2017 बैच को दूसरा और 2016 बैच को तीसरा एवं अंतिम अवसर मिलेगा। इसके अलावा 2010 से 2015 बैच के कुछ अधिकारियों को विशेष परिस्थितियों में शामिल किया गया है।


हालांकि, जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2029 से पहले होनी है, उन्हें इस प्रशिक्षण से बाहर रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण का लाभ उन अधिकारियों को मिले, जिनकी सेवा अवधि अभी पर्याप्त शेष है और जो भविष्य में उच्च जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।


बिहार कैडर के 38 अधिकारियों का चयन


सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सूची में बिहार कैडर के कुल 38 अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसमें कई जिलों के जिलाधिकारी (DM) और विभिन्न विभागों के अपर सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। चयनित अधिकारियों में सीतामढ़ी, वैशाली, पूर्णिया और नवादा जैसे जिलों के जिलाधिकारी भी शामिल हैं।


इसके अलावा पटना में तैनात कई वरिष्ठ अधिकारी—जैसे अपर सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारी—को भी इस प्रशिक्षण में भाग लेने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने सभी चयनित अधिकारियों को समय पर प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं।


यह रही लिस्ट में शामिल अफसरों की लिस्ट : - 

1.  विनय कुमार, मा.प्र.स. (बीएचः 2015) अपर सचिव, भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना।

2. अभय कुमार सिंह, भा.प्र.से. (बी एचः 2015) अपर सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार पटना।

3. अमित कुमार, भा.प्र.से. (बी एचः 2015) अपर सचिव, बिहार तकनीकी सेवा आयोग, पटना।

4.राशिद कलीम अंसारी, भा.प्र.से. (बी एचः 2015) प्रशासनिक पदाधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना। (प्रतिनियुक्ति-बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी, पटना)

5. मो. मुमताज आलम, भा.प्र.से. (बी एचः 2015) प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्तीय निगम, पटना।

6. विजय कुमार, भा.प्र.से. (बी एचः 2015) अपर सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना।

7. राजेश परिमल, भा.प्र.से. (बी एचः 2015) अपर सचिव, मुख्य मंत्री सचिवालय, बिहार, पटना।

8. रिची पाण्डेय, भा.प्र.से. (बी एचः 2016) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी।

9. वर्षा सिंह, भा.प्र.से. (बी एचः 2016) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, वैशाली (हाजीपुर)।

10 . अंशुल कुमार, भा.प्र.से. (बी एचः 2016) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, पूर्णिया।

11.  मुकुल कुमार गुप्ता, भा.प्र.से. (बी एचः 2016) निदेशक, उद्योग, उद्योग विभाग, बिहार, पटना।

12. रवि प्रकाश, भा.प्र.से. (बी एचः 2016) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, नवादा।

13.  विजय प्रकाश मीणा, भा.प्र.से. (बी एचः 2016)

14.  वैभव चौधरी, भा.प्र.से. (बी एचः 2016) अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना।

15. तनय सुल्तानिया, भा.प्र.से. (बी एचः 2017) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, भोजपुर (आरा)।

16.  तरनजोत सिंह, भा०प्र०से० (बी एचः 2017) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, पश्चिम चंपारण (बेतिया)।

17.  विशाल राज, भा.प्र.से. (बी एचः 2017) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, किशनगंज।

18. आरिफ अहसन, भा.प्र.से. (बी एचः 2017) राज्य परिवहन आयुक्त, बिहार, पटना।

19. विवेक रंजन मैत्रेय, भा.प्र.से. (बी एचः 2017) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, सिवान।

20.  कुमार गौरव, भा.प्र.से. (बी एचः 2017) अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, पटना।

31.  वैभव श्रीवास्तव, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, सारण (छपरा)।

32. विनोद दूहन, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, अररिया।

33.अभिषेक रंजन, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, मधेपुरा।

34.  शेखर आनन्द, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, शेखपुरा।

35.  अमृषा बैन्स, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, अरवल।

36.  साहिला, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, बक्सर।

37. निखिल धनराज निप्पणीकर, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, मुंगेर।

38.  नितिन कुमार सिंह, भा.प्र.से. (बी एचः 2018) समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ)।


प्रमोशन से जुड़ा है प्रशिक्षण

सरकार ने साफ किया है कि यह प्रशिक्षण अधिकारियों की पदोन्नति से सीधे जुड़ा हुआ है। आईएएस (वेतन) नियम 2016 के अनुसार, जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) में नियुक्ति के लिए MCTP चरण-III को सफलतापूर्वक पूरा करना अनिवार्य है।


यदि कोई अधिकारी इस प्रशिक्षण को पूरा नहीं करता है, तो उसकी पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकार का कहना है कि प्रशिक्षण के हर चरण के लिए पहले से संसाधनों और फैकल्टी की योजना बनाई जाती है, इसलिए इसमें अनुपस्थिति या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


पंजीकरण और रिपोर्टिंग की समय-सीमा


सभी पात्र अधिकारियों को 11 अप्रैल 2026 तक निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पंजीकरण की हार्ड कॉपी संबंधित विभाग को भी उपलब्ध करानी होगी।इसके अलावा, चयनित अधिकारियों को 10 मई 2026 (रविवार) को मसूरी स्थित अकादमी में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम समय पर शुरू हो सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।


प्रशासनिक गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे अधिकारियों को नई नीतियों, तकनीकों और प्रबंधन कौशल की जानकारी मिलती है, जो उन्हें बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है।


कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में शासन-प्रशासन की गुणवत्ता पर साफ दिखाई देगा।