Bihar highway news : बिहार सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों (नेशनल हाईवे) पर बढ़ते अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और असुरक्षित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। राज्य सरकार का कहना है कि हाईवे पर अनियंत्रित ढंग से चल रहे ढाबे, होटल और सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों की वजह से सड़क हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए अब सख्त कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है।
इस मुद्दे पर बुधवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार सड़क सुरक्षा परिषद की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, पुलिस मुख्यालय, एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने माना कि राष्ट्रीय उच्च पथों के किनारे अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
बैठक में फैसला लिया गया कि राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे (ROW) क्षेत्र में अब किसी भी प्रकार की अवैध पार्किंग की अनुमति नहीं होगी। खासकर भारी और व्यावसायिक वाहनों को हाईवे किनारे खड़ा करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। ऐसे वाहन केवल निर्धारित ट्रक ले-बाय और वे-साइड अमेनिटी स्थलों पर ही पार्क किए जा सकेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों और चालकों पर जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
सरकार ने हाईवे किनारे बने अवैध ढाबों, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ऐसे सभी अवैध निर्माणों को 20 दिनों के भीतर हटाना होगा। तय समय सीमा के बाद भी यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो जिला प्रशासन संयुक्त अभियान चलाकर कार्रवाई करेगा।
इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स को जिम्मेदारी दी गई है। इस टास्क फोर्स में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल रहेंगे। यह टीम संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने का काम करेगी।
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में अब किसी भी नए ढाबे, होटल या व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था निर्माण करना चाहती है तो पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। बिना एनओसी के निर्माण करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा जिन ढाबों, होटलों या प्रतिष्ठानों का प्रवेश सीधे हाईवे से है, उन्हें वैकल्पिक पहुंच मार्ग विकसित करना होगा। सरकार का कहना है कि सीधे हाईवे से एंट्री और एग्जिट होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। यदि निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया तो कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पथ निर्माण विभाग ने हाईवे सेफ्टी जोन को लेकर भी नई व्यवस्था स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार आवासीय क्षेत्र में हाईवे से 40 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्र में 75 मीटर के दायरे में आने वाले निर्माण कार्यों के लिए संबंधित विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
सरकार ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि कहीं राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग या असुरक्षित गतिविधियां दिखाई देती हैं तो इसकी सूचना टोल-फ्री नंबर 1033 या राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए दी जा सकती है। सरकार का दावा है कि इस अभियान से हाईवे पर यातायात अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनेगा।





