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बिहार में भी हाईवे पर एयरक्राफ्ट उतरने की तैयारी, इन तीन सड़कों पर ELF की सुविधा होगी बहाल

बिहार में तीन हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) विकसित की जाएगी, जिससे हवाई जहाज और लड़ाकू विमान आपात स्थिति में उतर सकेंगे। पटना-पूर्णिया, गोरखपुर-सिलीगुड़ी और रामजानकी मार्ग पर विशेष सड़क रनवे बनाए जाएंगे।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार भी अब देश के अन्य राज्यों की तरह सड़कों पर हवाई जहाज और लड़ाकू विमान उतारने की क्षमता विकसित करने जा रहा है। इसके लिए तीन प्रमुख सड़कों की डीपीआर (डिज़ाइन एवं प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) बनाने का प्रावधान किया गया है। नेपाल सीमा से सटे होने के कारण ये तीन सड़के चुनी गई हैं।


अधिकारियों के अनुसार, पटना से पूर्णिया तक बनने वाले पहले एक्सप्रेस-वे में ईएलएफ की सुविधा विकसित होगी। 245 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर कुल 18,242 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक के 420 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे में भी ईएलएफ का प्रावधान होगा, जिसकी लागत लगभग 23,434 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा, रामजानकी मार्ग में सीतामढ़ी से नेपाल के भिट्ठामोड़ तक ईएलएफ की योजना है।


ईएलएफ निर्माण का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और भारतीय वायुसेना के सहयोग से किया जाएगा। सड़क रनवे की लंबाई आमतौर पर 5 किलोमीटर तक होगी और इसे युद्ध या आपातकालीन स्थिति में विमान संचालन के लिए तुरंत इस्तेमाल किया जा सकेगा।


सड़क पर हवाई जहाज उतरने के लिए विशेष तकनीकी मानक अपनाए जाएंगे। सड़क का हिस्सा पूरी तरह सीधा और समतल होना चाहिए। सड़क के नीचे जमीन धंसने वाली नहीं होनी चाहिए, ढलान नहीं होना चाहिए और बिजली के खंभे, मोबाइल टॉवर जैसी रुकावटें हटाई जाएंगी। दोनों ओर इतनी जगह होनी चाहिए कि फाइटर प्लेन गाइड करने के लिए पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम लगाया जा सके। डिवाइडर तुरंत हटाए जा सकेंगे और सड़क रनवे में 24-48 घंटे के भीतर परिवर्तन किया जा सकेगा।


भारत में पहली बार सड़क रनवे का प्रयोग 21 मई 2015 को यूपी के यमुना एक्सप्रेस-वे पर किया गया था। असम में भी सड़क रनवे मौजूद है। दुनिया में पहले सिंगापुर, स्वीडन, फीनलैंड, जर्मनी, पोलैंड और ताइवान ने इसे लागू किया है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के पास भी दो सड़क रनवे हैं, जिन्हें युद्धकालीन आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता