ब्रेकिंग
बख्तियारपुर में शिवचर्चा की आरती के दौरान घर में लगी आग, तीन लोगों की दर्दनाक मौतसासाराम में बोलेरो-ऑटो की टक्कर: CRPF जवान की मौत, पत्नी और दो बच्चों समेत 5 घायलस्कूल के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, SDM ने प्रधानाचार्य को किया शो-कॉज, रसोइया बर्खास्तदरभंगा में दर्दनाक सड़क हादसा, स्कॉर्पियो की टक्कर से पति-पत्नी की मौत; LNMU में प्रोफेसर थीं बबीता देवीबिहार में बढ़ा नदियों का जलस्तर, अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर में कटाव प्रभावित इलाकों का तेजस्वी यादव ने लिया जायजाबख्तियारपुर में शिवचर्चा की आरती के दौरान घर में लगी आग, तीन लोगों की दर्दनाक मौतसासाराम में बोलेरो-ऑटो की टक्कर: CRPF जवान की मौत, पत्नी और दो बच्चों समेत 5 घायलस्कूल के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, SDM ने प्रधानाचार्य को किया शो-कॉज, रसोइया बर्खास्तदरभंगा में दर्दनाक सड़क हादसा, स्कॉर्पियो की टक्कर से पति-पत्नी की मौत; LNMU में प्रोफेसर थीं बबीता देवीबिहार में बढ़ा नदियों का जलस्तर, अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर में कटाव प्रभावित इलाकों का तेजस्वी यादव ने लिया जायजा

बिहार में उच्च शिक्षा की खुली पोल: NIRF रैंकिंग में निराशाजनक प्रदर्शन, Top 100 में एक भी विश्वविद्यालय नहीं

NIRF Ranking Bihar Universities: NIRF रैंकिंग में बिहार की उच्च शिक्षा का खराब प्रदर्शन जारी है। पिछले नौ वर्षों में कोई भी विश्वविद्यालय टॉप-100 में जगह नहीं बना सका, जबकि कॉलेज टॉप-200 से बाहर हैं।

NIRF Ranking Bihar Universities
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

NIRF Ranking Bihar Universities: बिहार में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने के तमाम दावों के बावजूद राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) के ताजा आंकड़े निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। बीते नौ वर्षों में राज्य का कोई भी विश्वविद्यालय देश के टॉप-100 शिक्षण संस्थानों में जगह नहीं बना सका है।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, कालेजों की स्थिति और भी चिंताजनक है। वर्ष 2017 से शुरू हुई कॉलेज रैंकिंग में अब तक बिहार का कोई भी महाविद्यालय टॉप-200 सूची में शामिल नहीं हो सका है। यह स्थिति राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


हालांकि, 2024 में शुरू हुई स्टेट यूनिवर्सिटी श्रेणी में पहली बार पटना विश्वविद्यालय 84वें स्थान पर रहा था, लेकिन 2025 की सूची (टॉप-150) में यह विश्वविद्यालय अपनी जगह भी नहीं बना सका। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षकों के खाली पद और सत्रों में देरी जैसे कारणों से बिहार के उच्च शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।


वर्ष 2016 की एनआईआरएफ रैंकिंग में बिहार से गया स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) को 94वां स्थान मिला था। इसका कुल स्कोर 48.89 रहा था। इसमें शिक्षण, अधिगम और संसाधन में 76.46, अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास में 42.79, आउटरीच और समावेशिता में 46.84 तथा ग्रेजुएशन आउटकम में 36.20 अंक प्राप्त हुए थे। शुरुआती सफलता के बाद वर्ष 2025 तक बिहार का कोई भी विश्वविद्यालय इस प्रतिष्ठित सूची में दोबारा जगह नहीं बना सका।


एनआईआरएफ ने वर्ष 2017 से कॉलेजों को भी रैंकिंग के दायरे में शामिल किया। पिछले नौ वर्षों में जारी कॉलेज रैंकिंग में भी बिहार का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है और कोई भी कॉलेज टॉप-200 में शामिल नहीं हो सका है।


एनआईआरएफ (NIRF) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक वार्षिक रैंकिंग प्रणाली है, जिसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों—यूनिवर्सिटी, कॉलेज और अन्य संस्थानों—का मूल्यांकन करना है। इसका मुख्य लक्ष्य छात्रों को पढ़ाई, प्लेसमेंट और रिसर्च के लिए बेहतर संस्थान चुनने में मदद करना है।


इस रैंकिंग में संस्थानों का मूल्यांकन पांच प्रमुख आधारों पर किया जाता है—शिक्षण और संसाधन, अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास, परिणाम, आउटरीच और समावेशिता तथा धारणा।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता