PATNA: पिछले तीन महीने से गंभीर आर्थिक संकट झेल रही बिहार सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से मोटा कर्ज देने की गुहार लगाई है. सरकार का खजाना खाली है और हालत ये है कि दो महीने से वृद्धा पेंशन की राशि नहीं दी गई है. स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लेकर सड़क और पुल निर्माण का पैसा नहीं दिया जा रहा है. पहले से ही भरी कर्जे में फंसी बिहार की सरकार नया कर्ज लेकर गंभीर आर्थिक संकट से उबरने की तैयारी में है.
रिजर्व बैंक ने मांगा कर्ज
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बिहार सरकार इस समय भरी आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रही है और हालात संभालने के लिए ‘क्राइसिस मैनेजमेंट का काम किया जा रहा है। वित्तीय संकट से उबरने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से 12 हजार करोड़ रुपये का कर्ज मांगा है। इस कर्ज का बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और वृद्धा पेंशन भुगतान में खर्च होगा, जिससे करीब 1 करोड़ लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
दो महीने से वृद्धा पेंशन नहीं मिला
बिहार सरकार राज्य के वृद्धों, विकलांगों और विधवाओं को सामाजिक सुरक्षा पेंशन देती है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वालों की तादाद करीब एक करोड़ है. उन्हें दो महीने से पेंशन नहीं मिला है. बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया था. इस फैसले से सरकार पर हर महीने लगभग 1150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
मई में मिलेगा पेंशन
सरकार की योजना के मुताबिक, रिजर्व बैंक से कर्ज लेकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि दी जाएगी. इस कर्ज की पहली किस्त अप्रैल के अंत तक मिलने की उम्मीद है.इसके बाद मई महीने में मार्च और अप्रैल की पेंशन एक साथ लाभार्थियों के खाते में भेजी जाएगी।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से 58 हजार छात्रों की फीस अटकी
सरकार की खराब आर्थिक स्थिति का कई योजनाओं पर सीधा असर पड़ रहा है. राज्य में करीब 58 हजार छात्रों की फीस स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लंबित है। शिक्षा वित्त निगम ने संकेत दिए हैं कि मई से इनका भुगतान शुरू किया जा सकता है। यह भुगतान भी रिजर्व बैंक से मिलने वाली कर्ज की राशि से किया जाएगा।
सड़क और पुल परियोजनाएं ठप
सरकारी खजाने के खाली होने और फंड की कमी के कारण कई सड़क और पुल निर्माण परियोजनाएं फिलहाल रुकी हुई हैं। ट्रेजरी से भुगतान बंद होने के चलते निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कर्ज की राशि मिलती है, निर्माण कार्यों के लिए फंड जारी कर दिया जाएगा।
कर्ज के जाल में डूबेगा बिहार
बिहार अभी ही मोटे कर्ज में डूबा है. राज्य की कुल देनदारी 3.70 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। अनुमान है कि 2026 तक यह आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
सिर्फ ब्याज भुगतान की बात करें तो सरकार को इस साल लगभग 40 हजार करोड़ रुपये चुकाने होंगे, यानी हर दिन करीब 100 करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज में जा रहे हैं।
अपना राजस्व बढ़ाने की रणनीति
बिहार सरकार के बजट का ज्यादातर पैसा केंद्र सरकार से आता है. अब गंभीरी आर्थिक संकट झेल रही सरकार ने विभिन्न विभागों को राजस्व संग्रह बढ़ाने का निर्देश दिया है।
सरकार ने नगर विकास विभाग को संपत्ति कर वसूली तेज करने का निर्देश दिया है. वहीं परिवहन विभाग को वाहन संबंधित राजस्व बढ़ाने पर जोर देने को कहा है. खनन विभाग का राजस्व बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि आंतरिक संसाधनों से अधिकतम राजस्व जुटाकर किसी तरह आर्थिक संकट से उबरा जाए.
लगातार संकट में सरकार
1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत हुई है. वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही वेतन भुगतान में देरी, योजनाओं का अटकना और परियोजनाओं का ठप होना इस बात का संकेत है कि राज्य की आर्थिक स्थिति खराब स्थिति में है।





