1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 27, 2026, 2:02:31 PM
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Bihar News : बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। बढ़ती आबादी, तेजी से शहरीकरण और जमीन की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को दोगुना करने की योजना पर काम कर रही है। इस फैसले के लागू होने के बाद बिहार के शहरों में कम जमीन पर भी ऊंची और बड़े क्षेत्रफल वाली इमारतों का निर्माण संभव हो सकेगा।
राज्य के नगर विकास विभाग ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद यह नया नियम पूरे राज्य के शहरी निकायों में लागू कर दिया जाएगा।
वर्तमान FAR और प्रस्तावित बदलाव
अभी तक बिहार के शहरी क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो का मान लगभग 2.5 से 3 के बीच सीमित है। इसका सीधा असर यह होता है कि लोग अपनी जमीन का पूरा उपयोग नहीं कर पाते और भवनों की ऊंचाई पर भी कई तरह की पाबंदियां रहती हैं। इसी कारण घनी आबादी वाले शहरों में आवासीय और व्यावसायिक निर्माण सीमित रह जाता है।
लेकिन नए प्रस्ताव के तहत इसे बढ़ाकर 5.5 से 6 तक करने की योजना है। इसका अर्थ यह है कि अब किसी भी व्यक्ति या बिल्डर को अपनी जमीन के मुकाबले लगभग दोगुना निर्माण क्षेत्र मिलेगा। छोटे भूखंडों पर भी अब मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, बड़े फ्लैट्स और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाना आसान हो जाएगा।
बिल्डिंग नियमों में भी बड़े बदलाव
नगर विकास विभाग केवल FAR बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिल्डिंग बायलॉज में भी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। खासकर सेटबैक नियमों में ढील देने की तैयारी है, जिससे निर्माण क्षेत्र और बढ़ सके। प्रस्ताव के अनुसार अब कुल भूमि के लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्से तक निर्माण की अनुमति दी जा सकती है, जबकि पहले यह सीमा करीब 40 प्रतिशत तक सीमित थी।
इस बदलाव से शहरों में जमीन का अधिकतम उपयोग संभव होगा और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा। छोटे भूखंडों पर भी बड़े आवासीय टावर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ऑफिस बिल्डिंग बनाना संभव हो सकेगा।
मध्यम वर्ग और रियल एस्टेट को फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मध्यम वर्ग के लिए काफी राहत भरा साबित हो सकता है। बढ़ती जमीन की कीमतों के बीच लोग अब अपने छोटे प्लॉट पर भी बेहतर और ऊंचे मकान बना सकेंगे। इससे आवास की समस्या को कुछ हद तक हल करने में मदद मिलेगी। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी इस बदलाव से नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। बिल्डरों और डेवलपर्स के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार करना आसान होगा, जिससे निवेश और रोजगार दोनों में बढ़ोतरी संभव है।
बिहार के शहर बनेंगे ‘वर्टिकल सिटी’
इस नीति को बिहार के शहरी विकास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि शहरों को ‘वर्टिकल सिटी’ के रूप में विकसित किया जाए, जहां जमीन के बजाय ऊंचाई में विकास को बढ़ावा मिले। इससे शहरी विस्तार अधिक व्यवस्थित और आधुनिक तरीके से हो सकेगा।
नगर विकास विभाग का मानना है कि यह कदम स्मार्ट सिटी की दिशा में भी एक बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे न केवल आवास की समस्या कम होगी बल्कि शहरों का स्वरूप भी अधिक आधुनिक और सुव्यवस्थित बनेगा।
सरकार का रुख
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार विभाग ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है और जल्द ही इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलते ही इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।कुल मिलाकर यह प्रस्ताव बिहार के शहरी विकास में एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य के शहर अधिक आधुनिक, घने और ऊंची इमारतों वाले विकसित शहरी केंद्रों के रूप में नजर आ सकते हैं।