ब्रेकिंग
बहराइच में कार्यक्रम रद्द होने पर भड़के मुकेश सहनी, DM कार्यालय पहुंचकर प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोपविश्व स्तनपान सप्ताह पर NSMCH बिहटा की पहल, डॉक्टरों ने समझाया मां के दूध का महत्व; जानिए नवजात के लिए क्यों है सबसे खासनई टीम में कट्टर लालूवादियों को.., रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव को दी सलाह, बोलीं- यह काफी पहले होना चाहिए थाबिहार में साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 507 आरोपी गिरफ्तार; मुख्य सचिव ने की अहम बैठकबिहार में कहां हुआ गैंगवार? कुख्यात शराब माफिया को दिनदहाड़े मारी गोली, दो गोलियां लगने से हालत गंभीरबहराइच में कार्यक्रम रद्द होने पर भड़के मुकेश सहनी, DM कार्यालय पहुंचकर प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोपविश्व स्तनपान सप्ताह पर NSMCH बिहटा की पहल, डॉक्टरों ने समझाया मां के दूध का महत्व; जानिए नवजात के लिए क्यों है सबसे खासनई टीम में कट्टर लालूवादियों को.., रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव को दी सलाह, बोलीं- यह काफी पहले होना चाहिए थाबिहार में साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 507 आरोपी गिरफ्तार; मुख्य सचिव ने की अहम बैठकबिहार में कहां हुआ गैंगवार? कुख्यात शराब माफिया को दिनदहाड़े मारी गोली, दो गोलियां लगने से हालत गंभीर

Bihar Police : हत्या-लूट छोड़ अब भूत उतार रही पुलिस! बिहार में डायल-112 पर आ रहे ऐसे कॉल, पढ़कर आप भी रह जाएंगे हैरान

बिहार में आपातकालीन सेवा डायल-112 का लगातार दुरुपयोग सामने आ रहा है। हत्या, लूट और दुर्घटनाओं के बजाय पुलिस को भूत-प्रेत उतारने, भैंस खोजने, घरेलू झगड़े सुलझाने और फर्जी शिकायतों पर दौड़ लगानी पड़ रही है, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों तक मदद पहुंचने में

Bihar Police
Bihar Police
© ai photo
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Bihar Police : बिहार में लोगों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई डायल-112 आपातकालीन सेवा का उद्देश्य साफ था—हत्या, लूट, सड़क हादसा, महिलाओं की सुरक्षा और अन्य गंभीर अपराधों में पुलिस की तत्काल मदद उपलब्ध कराना। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कई जगहों पर यह सेवा अब इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम कम और "हर समस्या का सरकारी समाधान केंद्र" ज्यादा बनती जा रही है।

ताजा मामला बक्सर जिले के डुमरांव का है, जहां डायल-112 की टीम पिछले कुछ दिनों में ऐसे-ऐसे मामलों में दौड़ लगाती रही कि सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। कहीं भूत-प्रेत उतारने के लिए पुलिस बुला ली गई, कहीं कड़ाही चोरी का विवाद सुलझाना पड़ा, तो कहीं भैंस खोजने के लिए पुलिस को दौड़ना पड़ा। पति-पत्नी, भाई-बहन, देवर-भाभी और गोतनियों के झगड़े भी अब सीधे डायल-112 के भरोसे पहुंच रहे हैं।

भूत उतारने भी पहुंच गई पुलिस

23 जुलाई को राजडीहा गांव से मारपीट की सूचना मिली। डायल-112 की टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन जांच में पता चला कि पूरा विवाद डायन-टोना और भूत-प्रेत के आरोपों को लेकर था। सबसे दिलचस्प बात तब हुई जब एक पक्ष ने पुलिसकर्मियों से ही भूत उतारने की मांग कर दी। पुलिस ने काफी देर समझा-बुझाकर मामला शांत कराया, लेकिन कुछ समय के लिए जवान खुद असहज स्थिति में पड़ गए।

लूट की सूचना, लेकिन शिकायतकर्ता ही गायब

25 जुलाई को एक युवती ने बैंक के पास रुपये छीनने की सूचना देकर पुलिस को बुलाया। टीम तत्काल मौके पर पहुंची, लेकिन वहां न युवती मिली और न ही उसके मोबाइल पर संपर्क हो सका। काफी तलाश के बाद भी शिकायतकर्ता का पता नहीं चला। अब पुलिस इसे फर्जी सूचना मानकर जांच कर रही है।

कहीं सिटकनी खुलवाई, कहीं पारिवारिक पंचायत

एक बुजुर्ग ने मदद मांगी तो पुलिस पहुंची। पता चला कि बेटा बाहर से दरवाजा बंद कर चला गया था। पुलिस ने सिर्फ सिटकनी खोली और मामला खत्म हो गया। इसी तरह दो गोतनियों का झगड़ा, पति की शिकायत कि पत्नी किसी दूसरे व्यक्ति से फोन पर बात करती है, दो पत्नियों के बीच विवाद, देवर पर कड़ाही चोरी का आरोप और भैंस गुम होने जैसी शिकायतों पर भी डायल-112 की टीम को मौके पर जाना पड़ा।

बिहार में बढ़ रहे घरेलू विवाद

डायल-112 के अधिकारियों का कहना है कि इन दिनों सबसे ज्यादा कॉल घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों से संबंधित आ रही हैं। पिता-पुत्र, पति-पत्नी, भाई-बहन और रिश्तेदारों के बीच छोटी-छोटी बातों पर पुलिस को बुला लिया जाता है। कई मामलों का समाधान केवल बातचीत से हो जाता है, लेकिन तब तक पुलिस का समय और सरकारी संसाधन खर्च हो चुके होते हैं।

असली चिंता कहीं और है

डायल-112 जैसी सेवा का महत्व तब समझ में आता है जब किसी सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को तुरंत मदद चाहिए, किसी महिला को तत्काल सुरक्षा चाहिए या किसी अपराधी का पीछा करना हो। लेकिन यदि पुलिस की गाड़ियां हर समय घरेलू झगड़ों, भैंस खोजने या अंधविश्वास वाले मामलों में उलझी रहेंगी, तो किसी वास्तविक आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का समय प्रभावित होना तय है। यही वजह है कि पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि डायल-112 का उपयोग केवल वास्तविक आपात परिस्थितियों में करें।

यह सिर्फ डुमरांव की कहानी नहीं

अगर पूरे बिहार की बात करें तो हाल के वर्षों में डायल-112 पर घरेलू विवाद, आपसी कहासुनी और गैर-गंभीर शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ी है। कई जिलों में पुलिस पहले समझौता कराने वाली संस्था बनती है और उसके बाद कानून लागू करने वाली एजेंसी। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर हर छोटे-बड़े विवाद के समाधान के लिए पुलिस को ही पहला विकल्प मान लेते हैं। इसका एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि लोग पुलिस पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ यह भरोसा कई बार व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ भी बन जाता है।

ऐसा लगता है कि बिहार में डायल-112 का नया स्लोगन कुछ यूं होना चाहिए—"भूत हो या भैंस, झगड़ा हो या जंजीर, पुलिस है न!" अगर यही रफ्तार रही तो आने वाले दिनों में शायद शिकायतें कुछ ऐसी भी सुनने को मिलें—"सर, पड़ोसी का मुर्गा सुबह जल्दी बांग देता है, जरा समझा दीजिए..." या "साहब, मोबाइल का चार्जर नहीं मिल रहा, एक टीम भेज दीजिए।" मजाक अपनी जगह है, लेकिन सच यही है कि आपातकालीन सेवाओं का दुरुपयोग अंततः उसी समाज को नुकसान पहुंचाता है। जिस समय पुलिस किसी मामूली विवाद में उलझी होती है, उसी दौरान कहीं कोई सड़क दुर्घटना, महिला सुरक्षा का मामला या गंभीर अपराध घट सकता है, जहां हर मिनट कीमती होता है।

डायल-112 कोई सामान्य हेल्पलाइन नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली आपातकालीन सेवा है। इसे उसी गंभीरता से इस्तेमाल करना समाज की भी जिम्मेदारी है। पुलिस तभी प्रभावी होगी, जब जनता भी यह समझे कि हर समस्या का समाधान पुलिस की गाड़ी नहीं, बल्कि कई बार आपसी संवाद, स्थानीय पंचायत और सामाजिक समझदारी से भी निकल सकता है।