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Bihar Degree College : बिहार में जमीन दान करने वालों के नाम पर खुलेंगे डिग्री कॉलेज, सरकार लाई नई योजना; जानिए क्या है पूरा प्लान

बिहार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नई योजना शुरू की है। अब डिग्री कॉलेज के लिए जमीन दान करने वाले अपने परिवार या पूर्वजों के नाम पर कॉलेज का नाम रखवा सकेंगे।

Bihar Degree College : बिहार में जमीन दान करने वालों के नाम पर खुलेंगे डिग्री कॉलेज, सरकार लाई नई योजना; जानिए क्या है पूरा प्लान
Tejpratap
Tejpratap
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पटना: बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर राज्य सरकार अब नई रणनीति पर काम कर रही है। सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए जमीन की समस्या दूर करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग ने भूदाताओं के लिए विशेष नामकरण योजना तैयार करने का फैसला लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जो व्यक्ति नए डिग्री कॉलेज के लिए जमीन दान करेंगे, वे कॉलेज का नाम अपने इच्छित व्यक्ति के नाम पर रखवा सकेंगे।


मंत्री ने कहा कि यह नामकरण दानकर्ता के माता-पिता, पूर्वजों या परिवार के किसी सम्मानित सदस्य के नाम पर किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे लोग शिक्षा संस्थानों के लिए आगे बढ़कर जमीन उपलब्ध कराएंगे और राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार को गति मिलेगी।


उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग इस पूरी योजना को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। विभाग ने नए डिग्री कॉलेजों के लिए जमीन का नया मानक भी तय किया है। इसके अनुसार शहरी क्षेत्रों में कॉलेज खोलने के लिए न्यूनतम ढाई एकड़ जमीन आवश्यक होगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसके लिए पांच एकड़ भूमि की जरूरत होगी।


संजय सिंह टाइगर ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कॉलेज निर्माण के लिए पूरी जमीन उपलब्ध कराता है तो कॉलेज का नाम उसकी इच्छा के अनुरूप रखा जाएगा। वहीं, यदि कोई व्यक्ति जमीन का केवल एक हिस्सा दान करता है तो कॉलेज के किसी भवन, पुस्तकालय, कॉमन रूम, प्रयोगशाला या कक्षा का नाम उसके द्वारा बताए गए व्यक्ति के नाम पर रखा जाएगा।


राज्य सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में नए डिग्री कॉलेज खोलने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। विभाग ने आगामी एक जुलाई से नए कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।


हालांकि, कॉलेज संचालन की राह में सबसे बड़ी चुनौती भवन और जमीन की उपलब्धता बन रही है। कई स्थानों पर कॉलेज के लिए उपयुक्त भूमि नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण निर्माण कार्य में देरी हो रही है। इसे देखते हुए विभाग ने फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कॉलेजों का संचालन शुरू करने का निर्णय लिया है।


अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में कई कॉलेज अस्थायी भवनों या दूसरे सरकारी परिसरों में संचालित किए जा सकते हैं। लेकिन भविष्य में स्थायी भवन निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन की आवश्यकता होगी। इसी कारण सरकार ने अभी से जमीन की तलाश और भूदाताओं को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


शिक्षा विभाग का मानना है कि इस योजना से राज्य में उच्च शिक्षा का ढांचा मजबूत होगा और दूरदराज के छात्रों को अपने इलाके में ही डिग्री कॉलेज की सुविधा मिल सकेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में नए कॉलेज खुलने से छात्राओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों या शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।


सरकार को उम्मीद है कि नामकरण की सुविधा मिलने से समाज के संपन्न लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और संस्थाएं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के लिए आगे आएंगी। इससे न केवल कॉलेजों के लिए जमीन की समस्या का समाधान होगा, बल्कि राज्य में शिक्षा के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।