ब्रेकिंग
बिहार के अंचल कार्यालयों की अब हर दिन मॉनिटरिंग, VC के जरिए कामकाज की होगी पड़ताल; सरकार ने जारी किया आदेशदोहरी नागरिकता के बाद अब नए मामले में घिरे राहुल गांधी, सुनवाई के लिए कोर्ट ने तय की तारीखJDU विधायक पप्पू पांडेय को कोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक बरकरारदिलीप जायसवाल की कुर्सी पर निशांत कुमार ने कर लिया कब्जा: शपथ ग्रहण में दिखा दिलचस्प नज़ाराहलवाई की संदिग्ध मौत से सनसनी, परिजनों ने हत्या की जताई आशंका; थाना के सामने शव रखकर किया बवालबिहार के अंचल कार्यालयों की अब हर दिन मॉनिटरिंग, VC के जरिए कामकाज की होगी पड़ताल; सरकार ने जारी किया आदेशदोहरी नागरिकता के बाद अब नए मामले में घिरे राहुल गांधी, सुनवाई के लिए कोर्ट ने तय की तारीखJDU विधायक पप्पू पांडेय को कोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक बरकरारदिलीप जायसवाल की कुर्सी पर निशांत कुमार ने कर लिया कब्जा: शपथ ग्रहण में दिखा दिलचस्प नज़ाराहलवाई की संदिग्ध मौत से सनसनी, परिजनों ने हत्या की जताई आशंका; थाना के सामने शव रखकर किया बवाल

Bihar News: नीतीश सरकार का बड़ा फैसला,अब छोटे अपराध में मिलेगी यह सजा; तय किया नया नियम

Bihar News: बिहार में अपराध सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब सामान्य और छोटे अपराध करने वालों को सलाखों के पीछे नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उन्हें समाज के लिए काम करने का अवसर मिलेगा।

Bihar News
बिहार न्यूज
© GOOGLE
PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Bihar News: बिहार में अपराध सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब सामान्य और छोटे अपराध करने वालों को सलाखों के पीछे नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उन्हें समाज के लिए काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि अपराधियों को जेल में बंद करने से ज्यादा जरूरी है उन्हें समाजोपयोगी कार्यों में शामिल करना, ताकि वे अपनी गलती सुधार सकें और समाज में जिम्मेदारी के साथ दोबारा खड़े हो सकें। यही कारण है कि राज्य सरकार ने *बिहार सामुदायिक सेवा नियमावली 2025 को अधिसूचित कर दिया है।


दरअसल, नई नियमावली के तहत न्यायालय छह माह से लेकर तीन साल तक की सजा वाले मामलों में, अपराधी की पृष्ठभूमि और परिस्थिति को देखते हुए, उसे सामुदायिक सेवा की सजा दे सकेगा। दोषियों को अस्पताल, नगर निकाय, सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, पुलिस थाना, वृद्धाश्रम, वन विभाग और जू/संग्रहालय जैसे स्थानों पर सेवा देनी होगी। यह सेवा सफाई, रखरखाव, पौधरोपण, ट्रैफिक नियंत्रण, पुस्तकालय प्रबंधन और लिपिकीय कार्यों के रूप में होगी।


यह सुविधा मुख्य रूप से पहली बार अपराध करने वाले या परिस्थितिवश सामान्य अपराध में दोषी पाए गए व्यक्तियों को दी जाएगी। आदेश तभी पारित होगा जब अपराधी लिखित रूप से सामुदायिक सेवा करने के लिए सहमत होगा। सजा की अवधि अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार तय होगी, जो 1 से 31 दिन या 4 से 40 घंटे तक हो सकती है। खास बात यह है कि यह सजा अपराधी के रोजगार और शिक्षा को प्रभावित नहीं करेगी। अगर कोई दोषी सामुदायिक सेवा का पालन नहीं करता, तो न्यायालय उसे नोटिस भेजेगा और आदेश की अवहेलना करने पर मूल सजा और जुर्माना लगाया जाएगा। सेवा के दौरान किसी तरह का वेतन या पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा।


बता दें कि इसे सफल रुप प्रदान करने के लिए सामुदायिक सेवा समिति बनाई जाएंगी। जिला समिति में डीएम, एसपी, जिला कल्याण पदाधिकारी और परिवीक्षा पदाधिकारी शामिल होंगे, जबकि राज्य समिति की अध्यक्षता गृह विभाग का सचिव करेगा। इन समितियों का दायित्व होगा कि अपराधियों को उचित स्थान पर सेवा के लिए भेजा जाए और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाए।


इस कदम से जेलों पर भार कम होगा और छोटे अपराधियों को सुधारने का मौका मिलेगा। साथ ही, समाज में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी। यह पहल न केवल अपराधियों के पुनर्वास के लिए उपयोगी है, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी अहम साबित होगी।


बिहार सरकार का यह निर्णय आपराधिक न्याय प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव है। यह पहल अपराधियों को दंडित करने की बजाय उन्हें सुधार और समाजोपयोगी बनने का अवसर देगी। सामुदायिक सेवा के जरिए अपराधियों को यह सीखने का मौका मिलेगा कि समाज के लिए काम करना ही असली जिम्मेदारी है।

संबंधित खबरें