Bihar News : बिहार सरकार ने शहरों में व्यापार और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब छोटे भूखंडों पर भी पहले की तुलना में बड़े व्यावसायिक भवन बनाए जा सकेंगे। राज्य सरकार ने बिहार बिल्डिंग बायलाज 2014 में संशोधन करते हुए सेटबैक नियमों में महत्वपूर्ण राहत दी है। इस बदलाव के बाद छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और रियल एस्टेट सेक्टर को काफी फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के अनुसार अब व्यावसायिक भवनों के लिए प्लॉट के इस्तेमाल की सीमा बढ़ा दी गई है। पहले केवल 40 प्रतिशत भूखंड पर निर्माण की अनुमति थी, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद अधिकतम 70 प्रतिशत हिस्से पर निर्माण किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे शहरों में छोटे प्लॉट का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा और कॉमर्शियल डेवलपमेंट को नई रफ्तार मिलेगी।
यह बदलाव उद्योग विभाग के अनुरोध पर किया गया है। सरकार का कहना है कि बिहार के तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में छोटे भूखंडों पर निर्माण को आसान बनाना जरूरी था ताकि निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकें। नए नियमों के लागू होने से खासतौर पर उन व्यापारियों को राहत मिलेगी जिनके पास सीमित जमीन है लेकिन वे बड़ा व्यावसायिक ढांचा तैयार करना चाहते हैं।
नए प्रावधानों के तहत 10 मीटर तक चौड़ाई वाले प्लॉट पर अगल-बगल खुली जगह छोड़ना जरूरी नहीं होगा। हालांकि ऐसे भवनों की अधिकतम ऊंचाई 10 मीटर तक ही सीमित रखी गई है। इससे छोटे दुकानदारों और बाजार क्षेत्रों में निर्माण कार्य आसान हो जाएगा। माना जा रहा है कि शहरों के घनी आबादी वाले इलाकों में इसका सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा।
सरकार ने अलग-अलग आकार के प्लॉट के लिए नए सेटबैक नियम भी तय किए हैं। 10 से 15 मीटर चौड़े भूखंड पर अब 1.8 मीटर खुली जगह छोड़नी होगी। वहीं 15 से 21 मीटर तक के प्लॉट पर दो मीटर और 21 से 27 मीटर तक के भूखंड पर ढाई मीटर खुली जगह रखना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा 39 मीटर से अधिक चौड़े प्लॉट पर कम से कम चार मीटर खुली जगह छोड़ना जरूरी होगा।
सिर्फ साइड सेटबैक ही नहीं बल्कि भवन के आगे और पीछे छोड़ी जाने वाली खुली जगह के नियमों में भी राहत दी गई है। 10 मीटर गहराई वाले प्लॉट पर अब आगे केवल 1.5 मीटर और पीछे एक मीटर जगह छोड़ना पर्याप्त होगा। पहले की तुलना में यह नियम काफी आसान माना जा रहा है, जिससे निर्माण लागत और डिजाइन दोनों में सुविधा मिलेगी।
33 मीटर से अधिक गहराई वाले प्लॉट के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं। ऐसे प्लॉट पर भवन के सामने कम से कम छह मीटर और पीछे साढ़े चार मीटर खुली जगह रखना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि सुरक्षा, रोशनी और वेंटिलेशन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था बनाई गई है।
नए सेटबैक नियम अधिकतम 16 मीटर ऊंचे व्यावसायिक भवनों पर लागू होंगे। रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इसे राज्य सरकार का बड़ा राहत पैकेज मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बिहार के शहरों में छोटे भूखंडों पर तेजी से कॉमर्शियल प्रोजेक्ट विकसित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
सरकार के इस फैसले को शहरी विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर पटना समेत राज्य के कई बड़े और मध्यम शहरों में देखने को मिल सकता है, जहां छोटे प्लॉट पर बड़े व्यापारिक भवन बनाने की मांग लगातार बढ़ रही है।




