नये साल पर बड़ा तोहफा: बिहार में भिखारियों को भी रोजगार दे रही नीतीश सरकार, जानिए क्या है स्कीम?

नीतीश सरकार की मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत भिखारियों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास के अवसर दिए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य भिखारियों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देना है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 04 Jan 2026 06:35:20 PM IST

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बिहार में अब भिखारियों को रोजगार - फ़ोटो social media

PATNA: बिहार सरकार भिक्षावृत्ति को रोकने और भिखारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत राज्य के भिखारियों को छोटे व्यवसाय के लिए 10,000 रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जा रही है।


बता दें कि बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका से जुड़ी महिलाओं के खातों में 10-10 हज़ार रुपये की राशि भेजी है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत यह राशि दी गयी है। हालांकि शहरी क्षेत्र में रहने वाली महिलाएं जिन्होंने ONLINE फॉर्म भरा था, उन्हें 10 हजार रूपये अभी तक नहीं मिल पाया है। अभी कई महिलाओं को दस हजार रुपये का लाभ मिला भी नहीं था कि अब नीतीश सरकार ने भिखारियों को नये साल का तोहफा दिया है। भिखारियों को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार 10 हजार रुपये की मदद कर रही है। बता दें कि राज्य में 19 भिक्षुक पुनर्वास गृह संचालित हैं, जहां भिखारियों को रहना, खाना और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया जाता है।


योजना का उद्देश्य और लाभ:

भिखारियों को स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना।

आवेदक और उसका परिवार भिक्षावृत्ति पर निर्भर होना चाहिए।

वृद्ध, विधवा और दिव्यांग भिखारियों को पेंशन दी जाती है।

आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाता खुलवाने में मदद।

बच्चों की शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण का प्रावधान।


भिक्षुक पुनर्वास के उत्पादक समूह:

राज्य में 6 सक्षम उत्पादक समूह संचालित हैं। इन समूहों में भिखारियों को स्किल डेवलपमेंट कोर्स दिए जाते हैं। समूह अगरबत्ती, दिया-बाती, नारियल झाड़ू, चप्पल और जूट से बने उत्पादों का निर्माण और बिक्री करते हैं। प्राप्त आय का वितरण उत्पादकों में किया जाता है।


राज्य के जिले और केंद्र: 

पुनर्वास गृह पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण में संचालित हैं।

पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, अररिया, किशनगंज, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, मधेपुरा, औरंगाबाद, कटिहार, अरवल और रोहतास में 14 भिक्षुक पुनर्वास गृह और भोजपुर में 2 हाफ वे होम स्थापित किए जा रहे हैं।


योजना में आवेदन प्रक्रिया:

लाभार्थी बिहार के मूल निवासी होने चाहिए।

बाल भिक्षुक और वृद्धों के लिए विशेष प्रावधान हैं।

आवेदन के लिए आर्थिक स्थिति का प्रमाण पत्र तहसीलदार या संबंधित अधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है।

विकलांग या गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले आवेदकों के लिए डॉक्टर का प्रमाण पत्र आवश्यक।

आवेदन जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग या जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (सक्षम कार्यालय) से प्राप्त किया जा सकता है।

भौतिक सत्यापन के बाद योग्य भिखारियों को योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। बता दें कि वर्तमान में 544 भिखारियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। योजना के माध्यम से भिखारियों को न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने का अवसर भी मिलता है।