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Bihar news : बिहार में बालू घाटों की नीलामी पर बड़ा फैसला, अटकी प्रक्रिया होगी खत्म! निर्माण कार्यों में आएगी जबरदस्त रफ्तार

बिहार में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया अब तेजी पकड़ रही है। राज्य सरकार ने लंबित मंजूरियों और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिससे निर्माण कार्यों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल बालू की आपूर्ति सुधरेगी

Bihar news : बिहार में बालू घाटों की नीलामी पर बड़ा फैसला, अटकी प्रक्रिया होगी खत्म! निर्माण कार्यों में आएगी जबरदस्त रफ्तार
Tejpratap
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Bihar news : बिहार में लंबे समय से अटकी बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया अब तेजी पकड़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने इस दिशा में सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल राजस्व में बढ़ोतरी होगी, बल्कि राज्य में चल रहे निर्माण कार्यों को भी नई गति मिलेगी।


राज्य में कुल 463 बालू घाटों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से अब तक 360 घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष घाट पर्यावरणीय मंजूरी (इंवायरनमेंट क्लियरेंस) और अन्य तकनीकी कारणों से अटके हुए हैं। इन लंबित प्रक्रियाओं के कारण निर्माण क्षेत्र में बालू की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे कई विकास परियोजनाओं की गति धीमी पड़ गई है।


नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश

उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भू-तत्व मंत्री Vijay Kumar Sinha ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बालू घाटों की नीलामी में किसी भी प्रकार की देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को आदेश दिया है कि पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि लंबित घाटों की नीलामी जल्द पूरी हो सके।


मंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी प्रक्रियाओं में समन्वय की कमी के कारण अनावश्यक देरी हो रही है, जिसे तुरंत दूर करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि CTE (Consent to Establish) और CTO (Consent to Operate) जैसी अनुमतियों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।


CTE-CTO प्रक्रिया बनी मुख्य बाधा

बालू घाटों की नीलामी में सबसे बड़ी बाधा पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ी CTE और CTO प्रक्रियाएं हैं। इन अनुमतियों के लिए अलग-अलग विभागों से स्वीकृति लेनी होती है, जिसमें काफी समय लग जाता है। इसी वजह से कई घाटों की नीलामी प्रक्रिया रुकी हुई है।


सरकार का कहना है कि इन प्रक्रियाओं को डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली से जोड़कर तेज किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो। विभागों को आपसी तालमेल बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।


केंद्र सरकार से भी अपील

राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी पत्र लिखा है। इसमें अनुरोध किया गया है कि पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाए, ताकि राज्यों को विकास कार्यों में बाधाओं का सामना न करना पड़े। सरकार का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य मिलकर प्रक्रिया को आसान बनाते हैं, तो विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा।


निर्माण कार्यों को मिलेगा बड़ा लाभ

बालू घाटों की पूरी नीलामी होने के बाद राज्य में बालू की उपलब्धता बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर सड़क, पुल, भवन और अन्य निर्माण परियोजनाओं पर पड़ेगा। निर्माण सामग्री की आपूर्ति सुचारू होने से प्रोजेक्ट्स की गति तेज होगी और लागत में भी संतुलन आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालू की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में कीमतें स्थिर होंगी, जिससे आम लोगों और ठेकेदारों दोनों को राहत मिलेगी।


राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद

सरकार को उम्मीद है कि सभी बालू घाटों की नीलामी पूरी होने के बाद राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध हो सकेंगे।


कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल राज्य में विकास और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम निर्माण क्षेत्र और आम जनता दोनों पर देखने को मिल सकते हैं।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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