1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 23 Feb 2026 11:15:12 AM IST
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में एक बार फिर मंदिरों की घेराबंदी का मुद्दा जोर-शोर से उठा। भाजपा विधायक तार किशोर प्रसाद ने सरकार से सीधा सवाल किया कि बिहार में जिन मंदिरों का अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, क्या उनकी चारदीवारी का निर्माण सरकार कराएगी? उन्होंने कहा कि कई जगहों पर मंदिर खुले पड़े हैं और अतिक्रमण का खतरा बना रहता है, ऐसे में सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए भाजपा विधायक सुनील कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक 10 हजार से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई है, चाहे वे पूरी तरह चिन्हित हों या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कब्रिस्तानों की घेराबंदी के लिए इतनी सक्रियता दिखाई गई, तो मंदिरों के मामले में पंजीकरण की शर्त क्यों रखी जा रही है? उनका कहना था कि न्यास बोर्ड में पंजीकृत नहीं होने के आधार पर मंदिरों की घेराबंदी रोकना उचित नहीं है।
विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सरकारी भूमि या गैर-मजरुआ जमीन को कब्रिस्तान घोषित कर घेराबंदी की जा रही है। खासकर बिहार शरीफ का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां कथित रूप से सरकारी जमीन को घेरकर कब्रिस्तान निर्माण का मामला सामने आया है। इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे बहुसंख्यक समाज में असंतोष बढ़ रहा है।
विपक्षी विधायकों का तर्क है कि यदि सरकार सभी धार्मिक स्थलों के प्रति समान नीति अपनाए, तो विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। भाई वीरेंद्र ने कहा कि इसमें एक समाज विशेष का जिक्र न हो। उनका कहना है कि मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है जितना अन्य धार्मिक स्थलों का।
इस पर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक न्यास परिषद में निबंधित मंदिरों की संख्या काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि मंदिर और कब्रिस्तान की घेराबंदी को लेकर जो बैठक 2016 के बाद नहीं हुई है, उसे जल्द बुलाया जाएगा। गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि संवेदनशील स्थलों की समस्याओं की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि घेराबंदी की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पंजीकरण के आधार पर होती है, ताकि किसी भी प्रकार का कानूनी विवाद न हो। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को समानता और न्याय से जोड़कर देख रहा है।अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और क्या अपंजीकृत मंदिरों के लिए कोई विशेष नीति बनाई जाती है। फिलहाल, विधानसभा में उठा यह सवाल राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।