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Bihar Assembly : संकट में आ गई सरकार ! जब JDU-BJP के तमाम विधायकों ने कर दिया बगावत, जानिए फिर क्या हुआ ...

बिहार विधानसभा में विधायक निधि बढ़ाने की मांग पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने। वित्त मंत्री ने कहा- सांसद निधि बढ़ेगी तो करेंगे विचार।

Bihar Assembly : संकट में आ गई सरकार ! जब JDU-BJP के तमाम विधायकों ने कर दिया बगावत, जानिए फिर क्या हुआ ...
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई जब विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायक भी अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए। मुद्दा था विधायक निधि (MLA Fund) की राशि में बढ़ोतरी का। सदन में यह मामला उठते ही माहौल गरमा गया और पक्ष-विपक्ष के सदस्य एक सुर में सरकार से निधि बढ़ाने की मांग करने लगे।


सबसे पहले भाजपा विधायक प्रमोद कुमार ने ध्यानाकर्षण के दौरान विधायक निधि की वर्तमान राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसमें बढ़ोतरी की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा राशि से क्षेत्र में विकास कार्यों को पूरा करना बेहद कठिन हो गया है। इसके बाद भाजपा के ही विधायक नीरज कुमार बबलू ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि समय के साथ विकास योजनाओं की लागत बढ़ी है, लेकिन विधायक निधि की राशि में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है।


भाजपा विधायक सुनील कुमार ने भी सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में 25 योजनाओं का काम कराते-कराते ही पूरी राशि समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि जनता अपने क्षेत्र के विधायक से सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, स्कूल मरम्मत, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की अपेक्षा रखती है, लेकिन सीमित फंड के कारण सभी मांगों को पूरा करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में विधायक निधि की राशि में तत्काल वृद्धि जरूरी है।


मामला यहीं नहीं थमा। सत्तापक्ष के विधायकों की ओर से उठी इस मांग का विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया। देखते ही देखते सदन में दोनों पक्षों के सदस्य एक साथ आवाज बुलंद करने लगे। कुछ देर के लिए सदन में शोर-शराबे की स्थिति बन गई। सदस्य अपनी-अपनी सीट से खड़े होकर सरकार से स्पष्ट घोषणा की मांग करने लगे। इतना ही नहीं इस मामले में वोटिंग करवाने को भी मांग उठाने लगे। इस दौरान सबसे अहम् बात यह देखने को मिला कि इसको लेकर सत्ता पक्ष के विधायक ही सबसे अधिक अग्रेशन में नजर आए।


स्थिति को संभालने के लिए वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र की सरकार यदि सांसदों की राशि बढ़ा देती हैं तो हम इसको लेकर विचार करेंगे। मंत्री के इस जवाब से सदन पूरी तरह शांत नहीं हुआ। कई विधायकों ने इसे स्पष्ट आश्वासन नहीं मानते हुए तत्काल निर्णय की मांग की।


इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष लगातार सदन को शांत कराने की कोशिश करते रहे। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि मंत्री ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है, इसलिए सभी अपनी-अपनी सीट पर बैठ जाएं और कार्यवाही को आगे बढ़ने दें। लेकिन विधायक शांत बैठने को तैयार नहीं दिखे और हंगामा जारी रहा।


बाद में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सदन की गंभीरता को देखते हुए माननीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार इस विषय पर विचार करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधायक निधि के संबंध में सभी पहलुओं पर चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।


आज की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि विधायक निधि का मुद्दा अब केवल विपक्ष का नहीं रहा, बल्कि सत्तापक्ष के विधायक भी इसे लेकर दबाव की राजनीति करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। बढ़ती महंगाई और क्षेत्रीय विकास की मांगों के बीच सरकार के लिए यह विषय आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकता है।