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Budget Session 2026 : स्वास्थ्य विभाग के सवालों का जवाब देने में बुरे फंसे प्रभारी मंत्री, सरकार पर उठा सवाल तो बचाव में खड़े हुए विजय चौधरी

Budget Session 2026 : बिहार विधानसभा बजट सत्र के चौथे दिन स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सवाल पर मंत्री प्रमोद कुमार फंस गए। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्थिति संभालकर सरकार की इज्जत बचाई।

Budget Session 2026 : स्वास्थ्य विभाग के सवालों का जवाब देने में बुरे फंसे प्रभारी मंत्री, सरकार पर उठा सवाल तो बचाव में खड़े हुए विजय चौधरी
Tejpratap
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3 मिनट

Budget Session 2026 : बिहार विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन तकरार का दृश्य देखने को मिला। खासतौर पर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक सवाल सदन में जोरदार चर्चा का विषय बन गया। जैसे ही विपक्ष के एक विधायक ने स्वास्थ्य विभाग से संबंधित मुद्दे पर प्रश्न पूछा, विभाग के मंत्री मंगल पांडेय की जगह प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी जवाब देने के लिए खड़े हुए। लेकिन सवाल का जवाब देने में वे फंसते गए। मंत्री जब जवाब देने लगे तो उनके द्वारा बोले गए शब्दों में कई अंग्रेज़ी शब्द शामिल थे, जिससे न सिर्फ विपक्षी विधायक बल्कि कुछ सदस्यों को भी समझने में कठिनाई हुई। उनके जवाब की शैली इतनी जटिल और अस्पष्ट थी कि यह साफ तौर पर यह पता नहीं चल पा रहा था कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कहना चाहती है।

इस बीच विपक्ष के विधायक ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि सवाल का स्पष्ट और सटीक जवाब देने की बजाय मंत्री ने भ्रम फैलाया और सदन में समय व्यर्थ किया। सदन में यह दृश्य यह दिखा रहा था कि यदि प्रश्न का उत्तर ठीक से और सरल भाषा में नहीं दिया गया तो सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

इसी स्थिति में संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने विपक्ष और सरकार दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सवाल का उद्देश्य सदन में मुद्दों पर चर्चा करना है और सरकार हमेशा जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन जवाब देने की प्रक्रिया में कभी-कभी शब्दों के चयन या भाषा के कारण भ्रम उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार सदन की गरिमा और इज्जत को हमेशा बनाए रखती है, और इस तरह की परिस्थितियों में संसदीय कार्य मंत्री के हस्तक्षेप से ही सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलती है।