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Bihar Animal Husbandry: राज्य के नौजवानों के लिए खुशखबरी, इस स्कीम का फायदा उठा करें अपना कारोबार, 50% तक मिलेगी सब्सिडी

Bihar Animal Husbandry: बिहार में राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुपालन से रोजगार और उद्यमिता, 50% सब्सिडी। भेड़, बकरी, पोल्ट्री, चारा क्षेत्र में अवसर।

Bihar Animal Husbandry
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Bihar Animal Husbandry: बिहार सरकार ने युवाओं और पशुपालकों के लिए एक सुनहरा अवसर पेश किया है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (NLM-EDP) शुरू किया है, जो पशुपालन के जरिए बिहार में उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रहा है। इस योजना के तहत छोटे जुगाली करने वाले पशु (भेड़, बकरी), कुक्कुट (पोल्ट्री), सूअर पालन, और चारा उत्पादन में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पात्र उद्यमियों को 50% तक पूंजीगत सब्सिडी दी जा रही है, जो ग्रामीण बिहार में आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए द्वार खोल रही है।


राष्ट्रीय पशुधन मिशन, जो 2014-15 से लागू है और 2021-22 में संशोधित हुआ, पशुधन क्षेत्र में सतत विकास पर केंद्रित है। यह योजना 2021-26 तक लागू रहेगी। इसके उद्देश्य:

रोजगार सृजन: पोल्ट्री, भेड़-बकरी, सूअर पालन, और चारा क्षेत्र में उद्यमिता के जरिए रोजगार के अवसर।  

उत्पादकता में वृद्धि: नस्ल सुधार के माध्यम से प्रति पशु मांस, अंडा, बकरी का दूध, और ऊन का उत्पादन बढ़ाना।  

चारा आपूर्ति: चारा बीज की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और साइलेज, फॉडर ब्लॉक, और टोटल मिक्स्ड राशन (TMR) इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन।  

जोखिम प्रबंधन: पशुधन बीमा के जरिए किसानों की सुरक्षा।  

अनुसंधान और प्रशिक्षण: मुर्गी, भेड़-बकरी, और चारा क्षेत्र में अनुप्रयुक्त अनुसंधान और कौशल-आधारित प्रशिक्षण।  


इस मिशन के तहत बिहार में पशुपालकों और उद्यमियों को तकनीकी सहायता, वित्तीय प्रोत्साहन, और बाजार लिंकेज प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे पशुपालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित कर सकें।

कौन ले सकता है लाभ और सब्सिडी विवरण

NLM-EDP के तहत निम्नलिखित लोग और संगठन लाभ ले सकते हैं:  

निजी व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान सहकारी संस्थाएं (FCO), संयुक्त दायित्व समूह (JLG), और धारा 8 कंपनियां।


सब्सिडी की राशि और प्रोजेक्ट्स:  

पोल्ट्री फार्मिंग: 1,000 माता-पिता पक्षियों (लो-इनपुट टेक्नोलॉजी) के साथ पोल्ट्री और हैचरी इकाई के लिए 50% सब्सिडी, अधिकतम 25 लाख रुपये (दो समान किश्तों में)।  

भेड़-बकरी पालन: 500 मादा + 25 नर के साथ भेड़-बकरी फार्म के लिए 50% सब्सिडी, अधिकतम 50 लाख रुपये। छोटी इकाइयों (100+5) के लिए भी अनुपातिक सब्सिडी।  

सूअर पालन: 100 मादा + 25 नर के साथ सूअर प्रजनन फार्म के लिए 50% सब्सिडी, अधिकतम 30 लाख रुपये।  

चारा उद्यमिता: साइलेज, फॉडर ब्लॉक, या TMR इकाइयों के लिए 50% सब्सिडी, अधिकतम 50 लाख रुपये।  

सब्सिडी दो किश्तों में दी जाती है—पहली प्रोजेक्ट शुरू होने पर और दूसरी पूर्ण होने के बाद, राज्य कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा सत्यापन के बाद।


बिहार में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग इस योजना को लागू कर रहा है। विभाग ने क्षमता निर्माण पर जोर दिया है, जिसमें:  

प्रशिक्षण: पशुपालकों और राज्य के पदाधिकारियों को कौशल-आधारित प्रशिक्षण, ताकि वे नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम कर सकें।  

विस्तार सेवाएं: गुणवत्तापूर्ण तकनीकी सहायता और जागरूकता कार्यक्रम।  

डिजिटल सहायता: आवेदन और सब्सिडी ट्रैकिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल www.nlm.udyamimitra.in


आवेदन प्रक्रिया और संपर्क

इच्छुक उद्यमी और पशुपालक ऑनलाइन पोर्टल www.nlm.udyamimitra.in के जरिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं:  

आधार/पैन कार्ड, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, बैंक स्टेटमेंट, पिछले तीन साल की आयकर रिटर्न (यदि लागू), और प्रोजेक्ट से जुड़े किसानों की सूची।  

अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट www.dahd.nic.in पर जाएं या जिला पशुपालन कार्यालय से संपर्क करें।  

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