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बिहार के 99 नगर निकायों की होगी GIS मैपिंग, तैयार होगा ई-प्रॉपर्टी रजिस्टर, जानिए इसके फायदे

PATNA : देश के कई राज्यों में नगर निकायों की जीआईएस मैपिंग है। लेकिन, अब बिहार में भी इसकी शुरुआत होने जा रही है। बिहार के शहरों समेत नगर निकायों की जीआईएस मैपिंग होगी। इससे वहां क

बिहार के 99 नगर निकायों की होगी GIS मैपिंग, तैयार होगा ई-प्रॉपर्टी रजिस्टर, जानिए इसके फायदे
First Bihar
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PATNA : देश के कई राज्यों में नगर निकायों की जीआईएस मैपिंग है। लेकिन, अब बिहार में भी इसकी शुरुआत होने जा रही है। बिहार के शहरों समेत नगर निकायों की जीआईएस मैपिंग होगी। इससे वहां की सारी जमीनों की पूरी जानकारी आसानी से मिल पाएगी। नगर विकास और आवास विभाग की तरफ से बिहार के 99 नगर निकायों की मैपिंग की जाएगी, जिसकी तैयारी भी अब शुरू होने वाली है। 14 सितंबर को एजेंसी चुना जाएगा, जिसके बाद इस काम की ओर बढ़ा जाएगा। मैपिंग के लिए 6 महीने का वक्त निर्धारित किया गया है। 



अगर पहले चरण में सफलता मिल जाती है तो दूसरे चरण का काम शुरु किया जाएगा। मैपिंग के ज़रिये इलेक्ट्रॉनिक प्रॉपर्टी रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिससे सड़क, पार्क, मकान, गलियों की जानकारी आसानी से मिल पाएगी। इसके अलावा 2033 तक पटना सहित अन्य नगर निगम को एनसीआर की तरह विकसित किया जा सकेगा। होल्डिंग टैक्स आसानी से वसूलने के लिए प्रत्येक संपत्ति का मूल्यांकन किया जाएगा। 



मैपिंग के लिए पटना, समस्तीपुर, भागलपुर, बिहारशरीफ सहित 99 नगर निकायों को दो हिस्से और 20 ग्रुप में बांटे जाएंगे। एक हिस्से में 8 और दूसरे हिस्से में 12 ग्रुप रहेंगे। पटना को छोड़ कर सभी ग्रुप में क्षेत्रफल के अनुसार तीन से नौ निकायों को रखा गया है। बिहार की बात करें तो यहां 259 निकाय हैं। ऐसे में सभी निकायों में मैपिंग के लिए तीन चरणों में काम होना है। 108 वर्ग किमी पटना नगर निगम का क्षेत्रफल होने के कारण इसे पहले ग्रुप में रखा गया है। जबकि, सीवान नगर निगम का क्षेत्रफल लगभग 20 वर्ग किलोमीटर, हाजीपुर 17 वर्ग किलोमीटर है। ऐसे में इन निकायों के साथ ही तीन से चार टाउन एरिया को रखा गया है।



जीआईएस मैपिंग तैयार होने के बाद लोगों के कई फायदे मिलेंगे। इसकी मदद से संपत्ति विवाद से लेकर महानगर विकास तक में फायदा होगा। इससे जमीन, मकान के आसपास रहने वाले लोग, पार्क, सड़क, पूजा स्थल, सीवरेज सहित अन्य की जानकारी मिल पाएगी। ख़ास बात तो ये है कि इसके माध्यम से जमीन खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया जा सकेगा। 



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