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Bihar Model Schools 2026 : सरकारी स्कूलों की बदल गई तस्वीर! बिहार में 521 मॉडल स्कूल शुरू, स्मार्ट क्लास और मेरिट से होगा एडमिशन

बिहार सरकार ने 521 मॉडल स्कूलों का शुभारंभ किया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, आधुनिक लैब और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कक्षा 9 में प्रवेश NMMS मेरिट के आधार पर होगा। इस वीडियो में जानिए पूरी जानकारी।

Bihar Model Schools 2026 : सरकारी स्कूलों की बदल गई तस्वीर! बिहार में 521 मॉडल स्कूल शुरू, स्मार्ट क्लास और मेरिट से होगा एडमिशन
Tejpratap
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5 मिनट

Bihar Model Schools 2026 :  बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार आज एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बेगूसराय से ऑनलाइन माध्यम के जरिए राज्य के 521 मॉडल स्कूलों का शुभारंभ करेंगे। इन स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की योजना बनाई गई है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों जैसी बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं सरकारी संस्थानों में ही मिल सकें।


सरकार का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करना है। इसी सोच के तहत चयनित विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा, विज्ञान प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय और आधुनिक फर्नीचर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।


सरकारी स्कूलों को मिलेगा नया स्वरूप

राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक प्रखंड में चयनित सरकारी विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन संस्थानों में छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण देने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और विद्यार्थियों का सीखने का स्तर भी बेहतर होगा।


इन मॉडल स्कूलों में पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय और आरामदायक फर्नीचर जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल संसाधनों का भी उपयोग किया जाएगा।


कक्षा 9 में मेरिट के आधार पर होगा नामांकन

मॉडल स्कूलों में प्रवेश सामान्य सरकारी विद्यालयों की तरह नहीं होगा। कक्षा 9 में दाखिले के लिए राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMS) में सफल या बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।प्रत्येक संबंधित प्रखंड से पात्र विद्यार्थियों से आवेदन लिए जाएंगे और NMMS परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद चयनित छात्रों का नामांकन मॉडल स्कूलों में किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में कक्षा 9 के लिए कम से कम 40 विद्यार्थियों के एक सेक्शन की व्यवस्था की गई है।


सीमित छात्रों पर रहेगा विशेष फोकस

सरकार ने प्रत्येक सेक्शन में अधिकतम 40 विद्यार्थियों को ही रखने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान देने का अवसर उपलब्ध कराना है। कम संख्या वाले सेक्शन में पढ़ाई अधिक प्रभावी होगी और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर नियमित निगरानी रखी जा सकेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से कक्षा का माहौल अधिक अनुशासित और सीखने के अनुकूल बनेगा, जिससे छात्रों के बेहतर परिणाम सामने आएंगे।


छात्रवृत्ति योजना का भी मिलेगा लाभ

मॉडल स्कूलों में प्रवेश पाने वाले योग्य विद्यार्थियों को केंद्र सरकार की राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना का लाभ भी मिल सकेगा। इस योजना के तहत अभिभावकों की वार्षिक आय 3.5 लाख रुपये तक होनी चाहिए। वहीं सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कक्षा 7 में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार अंकों में छूट प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है।


बेगूसराय से पूरे राज्य को मिलेगा संदेश

521 मॉडल स्कूलों के शुभारंभ का मुख्य कार्यक्रम बेगूसराय में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी यहीं से वर्चुअल माध्यम के जरिए राज्य के सभी मॉडल स्कूलों का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही बिहार में सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक विस्तार शुरू हो जाएगा।


शिक्षा विभाग का मानना है कि आने वाले समय में मॉडल स्कूल सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नई पहचान बनेंगे। आधुनिक संसाधनों, बेहतर शिक्षण वातावरण और गुणवत्ता आधारित प्रवेश व्यवस्था के माध्यम से इन विद्यालयों से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आधार मिल सकेगा। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों और विद्यार्थियों का भरोसा भी मजबूत करेगी।