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Indian Railway : रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफा! ट्रांसफर और इस्तीफे के बाद भी इतने महीने तक मिल सकेगा सरकारी क्वार्टर, जानें नया नियम

भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है, जिससे ट्रांसफर या तकनीकी इस्तीफे के बाद होने वाली आवासीय परेशानियों में काफी कमी आएगी। पहले जहां कर्मचारियों को नए स्थान पर जॉइनिंग के दौरान पुराने रेलवे क्वार्टर को तुरंत

Indian Railway : रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफा! ट्रांसफर और इस्तीफे के बाद भी इतने महीने तक मिल सकेगा सरकारी क्वार्टर, जानें नया नियम
Tejpratap
Tejpratap
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Indian Railway : भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों के हित में एक अहम और राहत भरा फैसला लिया है। लंबे समय से ट्रांसफर और तकनीकी इस्तीफे के बाद रेलवे क्वार्टर खाली करने को लेकर कर्मचारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। खासकर जब किसी कर्मचारी का तबादला दूसरे जोन, वर्कशॉप या प्रोजेक्ट क्षेत्र में होता था, तब परिवार के साथ नए स्थान पर शिफ्ट होना और पुराने आवास को तुरंत खाली करना मुश्किल हो जाता था। इसी समस्या को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने अब नियमों में संशोधन करते हुए बड़ी राहत दी है।


नए आदेश के अनुसार, अब तकनीकी इस्तीफा देने वाले रेलवे कर्मचारियों को अपने पुराने रेलवे क्वार्टर को तय अवधि तक अपने पास रखने की सुविधा दी जाएगी। इस बदलाव के तहत कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त जुर्माने के चार महीने तक अपने रेलवे आवास में रह सकेंगे और इस दौरान उन्हें केवल सामान्य लाइसेंस फीस ही देनी होगी, यानी वही किराया देना होगा जो इस्तीफे या कार्यकाल समाप्ति के समय लागू था।


रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा कर्मचारियों के परिवारों के हित को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, बल्कि नए स्थान पर जॉइनिंग और शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। पहले तकनीकी इस्तीफे की स्थिति में आवास को लेकर स्पष्ट नियम न होने के कारण कर्मचारियों को अनिश्चितता और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता था।


नए प्रावधानों के अनुसार कुल आठ महीने तक रेलवे क्वार्टर रखने की अनुमति दी गई है। इसमें पहले चार महीने तक कर्मचारी सामान्य किराया यानी बेसिक लाइसेंस फीस पर क्वार्टर का उपयोग कर सकेंगे। इसके बाद अगले चार महीने तक उन्हें दोगुना किराया देना होगा। वहीं यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या उसे सेवा से हटाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में केवल एक महीने तक ही सामान्य किराए पर क्वार्टर रखने की अनुमति मिलेगी।


इसके अलावा, मृत्यु या लापता कर्मचारियों के मामलों में पहले से लागू नियमों के अनुसार अलग और अधिक लचीली व्यवस्था जारी रहेगी, जिससे उनके परिवारों को किसी तरह की तुरंत परेशानी का सामना न करना पड़े।हालांकि रेलवे बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि यह छूट सभी श्रेणियों और सभी प्रकार के क्वार्टरों पर समान रूप से लागू नहीं होगी। कुछ विशेष पदों, आरक्षित क्वार्टरों तथा रेलवे ऑडिट विभाग के कर्मचारियों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है।


जो कर्मचारी तकनीकी इस्तीफे की प्रक्रिया में हैं, वे अपने संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालय में आवेदन देकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आवेदन के आधार पर कर्मचारी अपने पुराने आवास को निर्धारित नियमों के अनुसार बनाए रख सकेंगे।


इसके साथ ही उन कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान तय किए गए हैं जिनका ट्रांसफर विभिन्न रेलवे जोन जैसे SECR, WCR, ECoR, NER, ECR, SWR या फिर RCF, MCF जैसी वर्कशॉप्स में होता है। ऐसे मामलों में कर्मचारी सामान्य लाइसेंस फीस देकर अपने पुराने रेलवे क्वार्टर को बनाए रख सकते हैं।


वहीं यदि पोस्टिंग नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे (NFR), साउथ कोस्ट रेलवे (SCoR), रायगढ़ा (ओडिशा), जम्मू डिवीजन या यूएसबीआरएल जैसे दूरस्थ और कठिन प्रोजेक्ट क्षेत्रों में होती है, तो वहां भी कर्मचारियों को सामान्य लाइसेंस फीस पर ही आवास बनाए रखने की अनुमति दी जाएगी। इस सुविधा के लिए हर साल नए सिरे से रिन्यूअल की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया और सरल हो जाएगी।


रेलवे बोर्ड ने यह निर्णय 18 मार्च से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है और यह अगली सूचना तक जारी रहेगा। इस कदम से न केवल कर्मचारियों पर प्रशासनिक दबाव कम होगा, बल्कि वे बिना मानसिक तनाव के देश के दूरदराज और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।