Bihar Teacher Leave Policy : बिहार के नियमित, संविदा व BPSC शिक्षकों के लिए 10 प्रकार के अवकाश तय, पूरी सूची जारी

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए शिक्षकों की नई अवकाश व्यवस्था जारी की है। इसमें नियमित, संविदा और बीपीएससी शिक्षकों के लिए मातृत्व, पितृत्व, आकस्मिक सहित कुल 10 प्रकार के अवकाश स्पष्ट किए गए हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 02 Jan 2026 02:26:12 PM IST

Bihar Teacher Leave Policy : बिहार के नियमित, संविदा व BPSC शिक्षकों के लिए 10 प्रकार के अवकाश तय, पूरी सूची जारी

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Bihar Teacher Leave Policy : बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (Bihar Education Project Council – BEPC) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए शिक्षकों की अवकाश व्यवस्था (Leave Configuration) की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य के नियमित, संविदा और बीपीएससी से नियुक्त शिक्षकों को मिलने वाले विभिन्न प्रकार के अवकाश, उनकी अवधि, पात्रता और सेवा शर्तों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। परिषद की यह पहल शिक्षकों के अवकाश प्रबंधन को पारदर्शी और सुगम बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।


जारी सूची के अनुसार, वर्ष 2026 के लिए कुल 10 प्रकार के अवकाश निर्धारित किए गए हैं, जिनमें मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, आकस्मिक अवकाश, विशेष अवकाश, बाल देखभाल अवकाश, अर्जित अवकाश सहित अन्य श्रेणियां शामिल हैं। यह व्यवस्था शिक्षकों के पूरे सेवा काल और वार्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।


मातृत्व अवकाश: महिलाओं को बड़ी राहत

सूची के अनुसार महिला शिक्षकों को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के तहत कुल 360 दिनों का अवकाश दिया जाएगा। यह सुविधा पूरे सेवा काल में दो बार प्राप्त की जा सकती है। खास बात यह है कि यह अवकाश सेवा से संबंधित अन्य शर्तों से मुक्त रखा गया है, जिससे महिला शिक्षकों को मातृत्व के दौरान किसी तरह की प्रशासनिक परेशानी न हो।


आकस्मिक और विशेष अवकाश

शिक्षकों को आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) के रूप में हर वर्ष 16 दिन का अवकाश मिलेगा, जिसे वर्षवार आधार पर लिया जा सकेगा। वहीं, विशेष अवकाश (Special Leave – SL) के तहत 24 दिन का प्रावधान किया गया है, जो महीने के हिसाब से उपयोग किया जा सकता है। यह व्यवस्था अचानक उत्पन्न होने वाली व्यक्तिगत या पारिवारिक परिस्थितियों में शिक्षकों के लिए सहायक साबित होगी।


असाधारण और बाल देखभाल अवकाश

परिषद की सूची में असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave) का भी प्रावधान है, जिसकी सीमा 999 दिन तय की गई है। यह अवकाश पूरे सेवा काल में लिया जा सकता है और विशेष परिस्थितियों में उपयोगी माना जाता है।


इसके अलावा महिला शिक्षकों के लिए बाल देखभाल अवकाश (Child Care Leave – CCL) को भी शामिल किया गया है। इसके तहत कुल 730 दिन का अवकाश पूरे सेवा काल में अनुमन्य होगा। हालांकि यह अवकाश केवल एक वर्ष की सेवा अवधि के लिए ही लागू माना जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे कार्यरत माताओं को बच्चों की देखभाल में सुविधा मिलेगी।


अर्जित अवकाश और अर्ध वेतन अवकाश

शिक्षकों को अर्जित अवकाश (Earned Leave – EL) के रूप में 300 दिन का प्रावधान किया गया है, जिसे पूरे सेवा काल में लिया जा सकता है। वहीं अर्ध वेतन अवकाश (Half Pay Leave – HPL) के तहत 180 दिन की सुविधा दी गई है। ये दोनों अवकाश शिक्षकों के दीर्घकालिक सेवा हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।


पितृत्व और अन्य अवकाश

पुरुष शिक्षकों के लिए पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत उन्हें 30 दिन का अवकाश मिलेगा, जिसे पूरे सेवा काल में दो बार लिया जा सकता है। यह कदम परिवार-केंद्रित नीतियों को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक माना जा रहा है। इसके अलावा सूची में कम्यूटेटिव लीव (Commutative Leave – CTL) और लीव नॉट ड्यू (Leave Not Due – LND) को भी शामिल किया गया है, जिनकी अवधि 180 दिन निर्धारित की गई है। ये अवकाश कैलेंडर वर्ष के आधार पर लागू होंगे।


किन शिक्षकों पर होगी लागू व्यवस्था

यह अवकाश व्यवस्था नियमित शिक्षक, बीपीएससी से चयनित शिक्षक और संविदा शिक्षक सभी पर समान रूप से लागू होगी। इससे पहले विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों के लिए अवकाश नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, जिसे अब दूर करने की कोशिश की गई है।


शिक्षा विभाग की मंशा

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस नई अवकाश व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों के कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बनाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल करना है। स्पष्ट नियमों से न केवल शिक्षकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि विद्यालयों के संचालन में भी पारदर्शिता आएगी।


कुल मिलाकर, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा जारी यह अवकाश सूची शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जहां शिक्षकों को अपने अधिकारों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी, वहीं शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।