1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 26 Feb 2026 11:54:42 AM IST
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज प्रश्नकाल में सीमांचल क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा गूंजा। अख्तरुल ईमान ने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए सरकार का ध्यान एक ऐसे गांव की ओर आकर्षित किया, जहां लगभग 500 की आबादी निवास करती है, लेकिन अब तक वहां तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
विधायक अख्तरुल ईमान ने सदन में कहा कि जिस गांव की वह बात कर रहे हैं, वहां के लोगों को आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब कच्चे रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं और गांव का संपर्क मुख्य सड़क से लगभग कट जाता है। उन्होंने कहा कि आज जब राज्य सरकार ग्रामीण विकास और संपर्क मार्गों के विस्तार की बात कर रही है, तब इस तरह के गांवों का अब भी सड़क सुविधा से वंचित रहना चिंता का विषय है।
उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि क्या उस गांव में पक्की सड़क निर्माण की कोई योजना है? यदि नहीं, तो क्या सरकार जल्द इस दिशा में ठोस पहल करेगी? विधायक ने यह भी कहा कि सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने में दिक्कत होती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को विशेष रूप से परेशानी झेलनी पड़ती है।
सदन में इस प्रश्न के जवाब में संबंधित विभाग के मंत्री ने प्रारंभिक जानकारी देते हुए कहा कि अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार उक्त गांव में सड़क की व्यवस्था होने की सूचना है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि माननीय विधायक को लगता है कि जमीनी हकीकत अलग है या वहां सड़क की स्थिति संतोषजनक नहीं है, तो मामले की पुनः जांच कराई जाएगी।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार किसी भी क्षेत्र की उपेक्षा नहीं करना चाहती। यदि स्थल निरीक्षण में यह पाया जाता है कि सड़क का अभाव है या मौजूदा सड़क उपयोग योग्य नहीं है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि 500 या उससे अधिक आबादी वाले सभी गांवों को सर्व-ऋतु (ऑल वेदर) सड़क से जोड़ा जाए।
मंत्री के इस जवाब पर अख्तरुल ईमान ने दोबारा आग्रह किया कि अधिकारियों की रिपोर्ट और जमीनी सच्चाई में अक्सर अंतर होता है। इसलिए आवश्यक है कि उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याएं कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखती हैं।
सदन में अन्य सदस्यों ने भी ग्रामीण सड़कों के मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कई बार योजनाएं स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होता या गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जाता। ऐसे में निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की जरूरत है।
प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा कुछ देर तक चर्चा का विषय बना रहा। अंततः मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि विधायक द्वारा बताए गए गांव में सड़क की कमी पाई जाती है तो प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
इस तरह, प्रश्नकाल में उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण संपर्क मार्गों का विस्तार और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग कब तक स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और उस गांव के लोगों को पक्की सड़क की सुविधा कब तक मिल पाती है।