1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 03, 2026, 8:05:38 AM
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Bihar Police : डिजिटल दौर में जहां तकनीक ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके अपनाकर ठगी के मामलों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। अब ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence का इस्तेमाल कर लोगों की आवाज और चेहरे की हूबहू नकल तैयार कर रहे हैं और उसी के जरिए धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। बिहार में ऐसे कई मामले सामने आने के बाद पुलिस ने आम लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
दरअसल, ठगी का यह नया तरीका बेहद चालाकी से काम करता है। सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या बाजार में कोई अनजान व्यक्ति—अक्सर वृद्ध या महिला—लोगों से मदद मांगता है। वह कहता है कि उसका फोन काम नहीं कर रहा, कॉल नहीं लग रही या फोन हैंग हो गया है। जैसे ही कोई व्यक्ति मदद के लिए उसका फोन हाथ में लेता है, उसी दौरान फोन में पहले से ही वीडियो कॉल या वॉयस रिकॉर्डिंग चालू रहती है। इस प्रक्रिया में सामने वाले व्यक्ति की आवाज और चेहरा रिकॉर्ड कर लिया जाता है।
इसके बाद साइबर ठग इस रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल कर Deepfake तकनीक के जरिए फर्जी प्रोफाइल तैयार करते हैं। यह प्रोफाइल इतनी असली लगती है कि पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। फिर इसी नकली पहचान के जरिए ठग पीड़ित के दोस्तों, रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों को कॉल कर इमरजेंसी का बहाना बनाकर पैसे की मांग करते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टूल्स के बढ़ते उपयोग से अब किसी की आवाज या चेहरा कॉपी करना पहले से कहीं आसान हो गया है। कई ऐसे ऑनलाइन टूल्स उपलब्ध हैं, जो कुछ ही मिनटों में किसी व्यक्ति की आवाज की नकल तैयार कर सकते हैं। यही वजह है कि हाल के दिनों में वॉयस क्लोनिंग के जरिए ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।
इतना ही नहीं, कई सरकारी और निजी सेवाओं में डिजिटल वेरिफिकेशन के लिए फेस या वॉयस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। ठग इन फर्जी प्रोफाइल्स के जरिए इस सुरक्षा प्रक्रिया को भी चकमा दे सकते हैं और बैंक खातों या अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं। ऐसे मामलों में आर्थिक नुकसान के साथ-साथ व्यक्ति की पहचान का भी दुरुपयोग हो सकता है।
बिहार पुलिस ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए लोगों के लिए कुछ जरूरी सावधानियां जारी की हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अजनबी व्यक्ति का मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति मदद मांगता भी है, तो दूरी बनाकर रखें और सीधे उसके फोन को हाथ में लेने से बचें।
इसके अलावा, किसी भी अनजान वीडियो कॉल में कैमरे के सामने आने से भी बचना चाहिए। ठग अक्सर इसी मौके का फायदा उठाकर चेहरे की रिकॉर्डिंग कर लेते हैं। सोशल मीडिया पर भी अपनी निजी तस्वीरें और वीडियो शेयर करते समय प्राइवेसी सेटिंग्स का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, ताकि आपकी जानकारी गलत हाथों में न पहुंचे।
पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि अगर किसी अज्ञात नंबर से कोई व्यक्ति खुद को आपका परिचित बताकर पैसे की मांग करता है, तो तुरंत भरोसा न करें। पहले उस व्यक्ति की पहचान किसी अन्य माध्यम से सत्यापित करें। फर्जी वीडियो कॉल की पहचान करने के लिए उसके लाइव मूवमेंट और व्यवहार पर भी ध्यान दें, क्योंकि कई बार डीपफेक वीडियो में हल्की तकनीकी खामियां दिखाई देती हैं।
अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर कार्रवाई से नुकसान को कम किया जा सकता है। बढ़ती डिजिटल ठगी के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।