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अब डाकिये ले जाएंगे पुलिस डाक, सॉफ्टवेयर से होगी ट्रैकिंग; जानिए किस वजह से बदला नियम

PATNA : पुलिस डाक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब सिपाहियों की जगह डाककर्मियों को दे दी गई है। इसको लेकर बिहार पुलिस और केंद्रीय डाक विभाग के बीच एक करार हो चुका है। इसके बाद अब आज यानी

अब डाकिये ले जाएंगे पुलिस डाक, सॉफ्टवेयर से होगी ट्रैकिंग; जानिए किस वजह से बदला नियम
Tejpratap
Tejpratap
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PATNA : पुलिस डाक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब सिपाहियों की जगह डाककर्मियों को दे दी गई है। इसको लेकर बिहार पुलिस और केंद्रीय डाक विभाग के बीच एक करार हो चुका है। इसके बाद अब आज यानी मंगलवार से डाकिये पुलिस डाक को पहुंचाने का काम शुरू कर देंगे। हालांकि,इस व्यवस्था की ट्रैकिंग भी की जाएगी ताकि किसी तरह की चूक न हो।


मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस डाक की ट्रैकिंग के लिए पोस्टल मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। इन्हें कार्यालय में बैठकर ही डाक विभाग के पदाधिकारी देख सकेंगे। पुलिस डाक जिस स्तर पर रुकेगा, वहां तुरंत उसकी पहचान की जा सकेगी। इसके साथ ही, समय से उसे संबंधित कार्यालय अथवा पदाधिकारी तक पहुंचाया जा सकेगा।


मालूम हो कि, बिहार में करीब सात हजार डाकघर हैं। इनमें से 1066 डाकघरों को स्थानीय थानों से जोड़कर मैपिंग की गई है। थानों से निकलने वाले पुलिस डाक को स्थानीय डाकघर द्वारा संबंधित कार्यालय के लिए रवाना किया जाएगा। दूसरी ओर अन्य पुलिस पदाधिकारियों के कार्यालय से थानों तक पहुंचने वाले डाक की डिलीवरी सुनिश्चित कराई जाएगी।


आपको बताते चलें कि,अभी तक डाकों का वितरण पुलिस सिपाहियों के द्वारा होता था जिस पर हर वर्ष करीब 60 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसमें एक हजार सिपाही बल भी लगता है। इसके अलावा सिपाहियों को भत्ता आदि का भी भुगतान करना होता है। नई व्यवस्था के बाद यह खर्च घटकर 75 लाख तक आ जाएगा। इससे बिहार पुलिस को करीब 59 करोड़ रुपये की बचत भी होगी।