PATNA:बिहार में ओवरलोड वाहनों से सड़कों और पुलों को हो रहे नुकसान को लेकर पटना हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अब इस समस्या पर नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक AI आधारित ‘वे-इन-मोशन’ तकनीक के जरिए बिना वाहन रोके ही वजन मापा जाएगा और नियम उल्लंघन करने पर स्वतः ई-चालान भी जारी किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायाधीश हरीश कुमार की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य में लागू हो रही इस तकनीक की प्रगति की समीक्षा की। यह सुनवाई विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर हुई। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता पी.के. शाही ने कोर्ट को बताया कि ओवरलोडिंग के कारण आरा-मोहनिया एनएच-30 पर दो प्रमुख पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और उनकी मरम्मत जारी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने भी माना कि अधिक भार सड़कों की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
कोर्ट के निर्देश पर 8 और 9 अप्रैल को महाधिवक्ता कार्यालय में संबंधित विभागों की बैठक हुई, जिसमें ओवरलोडिंग रोकने के उपायों पर सहमति बनी। इसके तहत केंद्र के सड़क मंत्रालय के सहयोग से बिहार में तीन स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘वे-इन-मोशन’ सिस्टम स्थापित किया गया है। इस हाईटेक सिस्टम में सेंसर, सीसीटीवी कैमरे और नंबर प्लेट पहचान तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो चलते वाहनों का वजन और क्षमता स्वतः दर्ज करता है। यदि कोई वाहन निर्धारित सीमा से अधिक लोड लेकर चलता पाया जाता है, तो बिना रोके ही उसका ई-चालान जारी कर दिया जाएगा और इसकी जानकारी सीधे खनन एवं परिवहन विभाग को भेज दी जाएगी।
यदि वाहन मालिक जुर्माना नहीं भरते हैं, तो उनके लाइसेंस के नवीकरण पर रोक लगाई जा सकती है और वाहन के संचालन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। खंडपीठ ने संकेत दिया है कि यदि यह तकनीक सफल साबित होती है, तो इसे पूरे राज्य में लागू किया जा सकता है। अब मामले पर अगली सुनवाई 12 मई को होगी।





