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सम्राट चौधरी की फजीहत कराने में लगे अधिकारी? भ्रष्टाचार के प्रतीक बने कर्मचारियों का निलंबन वापस होगा, सरकार ने कहा- पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने नहीं की थी कोई कार्रवाई

बिहार में हड़ताली राजस्व कर्मचारियों के निलंबन और फिर उसकी वापसी को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कोई सीधी कार्रवाई नहीं की थी, जबकि फैसले से प्रशासन और सरकार दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।

बिहार न्यूज
सरकार की फजीहत
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
6 मिनट

PATNA: बिहार में भ्रष्टाचार के प्रतीक बन चुके राजस्व कर्मचारी महीनों से हड़ताल पर हैं. 8 दिन पहले राज्य सरकार ने ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया था. 13 अप्रैल को सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी डीएम को पत्र लिखकर हड़ताली कर्मचारियों को सस्पेंड करने का निर्देश दिया था. उस समय तत्कालीन डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा इस विभाग के मंत्री थे. लेकिन 19 जून को ऐसे सारे कर्मचारियों का निलंबन वापस लेने का आदेश जारी कर दिया गया है. 


दिलचस्प बात ये है कि कर्मचारियों के निलंबन वापस लेने का मामला तूल पकड़ने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सफाई दी गई है. सरकार की ओर से कहा गया है कि 13 अप्रैल को कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निर्देश जारी किया था. लेकिन इसमें विभाग के तत्कालीन मंत्री विजय कुमार सिन्हा की कोई भूमिका नहीं थी. 


राज्य सरकार की फजीहत

पहले समझिये की मामला क्या है. बिहार के राजस्व कर्मचारी पिछले कई महीने से ह़ड़ताल पर हैं. वे तब हड़ताल पर गये जब तत्कालीन डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी. इसी दौरान कर्मचारियों के ह़ड़ताल पर जाने के कारण बिहार में जमीन से संबंधित सारे काम ठप हो गये. तत्कालीन डिप्टी सीएम ने ह़ड़ताली कर्मचारियों से कई दफे बातचीत की लेकिन वे हड़ताल से वापस नहीं लौटे. 


इसी बीच बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई. 14 अप्रैल को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफा देना था. इससे एक दिन पहले तत्कालीन डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने ह़ड़ताली राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया. इसके बाद 13 अप्रैल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव अपर सचिव महेंद्र पाल ने राज्य के सारे डीएम को पत्र भेजा गया जिसमें हड़ताली राजस्व कर्मचारियों पर अनुशासनिक कार्रवाई का निर्देश दिया गया था. इसी पत्र के आधार पर 14 और 15 अप्रैल को विभिन्न जिलों में 224 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था. 


सरकार बदलते ही फैसला बदला

15 अप्रैल को सम्राट चौधरी बिहार के नये मुख्यमंत्री बन गये. इसके चार दिन बाद राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार का स्टैंड ही बदल गया. 19 जून को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव महेंद्र पाल ने फिर से राज्य के सारे डीएम को पत्र लिखा. इस पत्र में कहा गया कि चूंकि बिहार में अभी जनगणना का काम चल रहा है और इस काम में राजस्व कर्मचारियों की भूमिका अहम है. इसलिए उनके निलंबन का फैसला वापस ले लिया जाये. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से पत्र मिलने के बाद सारे जिलों में हड़ताली राजस्व कर्मचारियों का निलंबन वापस लेने के ताब़ड़तोड़ फैसले लिये जाने लगे. 


अधिकारी करा रहे मुख्यमंत्री की फजीहत

बता दें कि बिहार में राजस्व कर्मचारी भ्रष्टाचार के प्रतीक बन चुके हैं. बिहार के लोग मानते हैं कि कर्मचारियों को घूस दिये बगैर कोई काम नहीं कराया जा सकता. लेकिन नई सरकार की राजस्व कर्मचारियों पर मेहरबानी से कई सवाल उठने लगे. सवाल ये उठ रहा था कि क्या पिछली सरकार में कर्मचारियों की हड़ताल प्रायोजित थी, ताकि तत्कालीन डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को रोका जा सके. नई सरकार बनते ही निलंबित कर्मचारियों को राहत देने के फैसले से इन अटकलों को बल मिला. 


सरकारी सफाई से और फजीहत

हड़ताली कर्मचारियों पर मेहरबानी की खबरों के फैलने के बाद आज अधिकारियों ने पहले तो खबर को झूठी करार दिया. लेकिन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का पत्र सार्वजनिक हो चुका था. इसके बाद मंगलवार की शाम राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सफाई दी गई, इससे सरकार की और फजीहत हो रही है.


क्या कहा गया है सफाई में?

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी सफाई में कहा गया है कि राजस्व कर्मचारियों के निलंबन वापसी की कार्रवाई सारे डीएम ने कि है. बिहार में जनगणना के महत्वपूर्ण कार्य को देखते हुए लिया गया ये फैसला लिया गया है. विभाग की ओर से कहा गया है कि बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 के अनुसार नियुक्ति एवं अनुशासनिक कार्रवाई का अधिकार जिलों के समाहर्ताओं को प्राप्त है, और इसी प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई.


विजय सिन्हा से बेचैनी

दिलचस्प बात ये है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ये कह रहा है कि हड़ताल पर गये जिन राजस्व कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, वह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशों के आलोक में जिला समाहर्ताओं द्वारा की गई थी। लेकिन इसमें तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा किसी भी स्तर पर सीधे निलंबन का आदेश जारी नहीं किया गया था. यानि विभाग के अधिकारी तत्कालीन डिप्टी सीएम और विभागीय़ मंत्री की मंजूरी के बगैर अपनी मर्जी से काम कर रहे थे. 


निलंबन वापसी के संबंध में विभाग ने कहा है कि 19 अप्रैल को अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल द्वारा जारी पत्र में भारत की जनगणना 2027 के मद्देनजर राजस्व कर्मचारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए समाहर्ताओं को आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। इसके बाद जिलों में नियमों के अनुरूप निलंबन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई. इसके साथ ही, 17 अप्रैल को कार्य पर लौटने वाले कर्मचारियों के संबंध में भी विभाग द्वारा सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए थे, जिससे प्रशासनिक कार्यों को सामान्य करने में सहायता मिली.

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रिपोर्टर / लेखक

Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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