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कोरोना हो ना हो.. बिहार के अंदर खेल में संक्रमण नियति बन गई, नेशनल महिला फुटबॉलर की दुर्दशा देखिए

BETTIAH : कोरोना वायरस ने दुनिया भर में लोगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रखी हैं। संक्रमण से बचाव के लिए हर कोई तरह-तरह के उपाय कर रहा है लेकिन बिहार में खेलकूद के अंदर आया संक्

FirstBihar
Santosh Singh
2 मिनट

BETTIAH : कोरोना वायरस ने दुनिया भर में लोगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रखी हैं। संक्रमण से बचाव के लिए हर कोई तरह-तरह के उपाय कर रहा है लेकिन बिहार में खेलकूद के अंदर आया संक्रमण अब स्थायी बन चुका है। राज्य के अंदर खेल और खिलाड़ियों की स्थिति क्या है यह बात किसी से छिपी नहीं है लेकिन लॉकडाउन के बीच बिहार की एक नेशनल महिला फुटबॉल की जो तस्वीर सामने आई है वह वाकई सबको हिलाकर रख देगी। 


नरकटियागंज की रहने वाली नेशनल फुटबॉलर मोनी लॉकडाउन के बीच रोटी के जुगाड़ में लगी हुई हैं। वह अपने पिता के साथ इन दिनों कपड़े धोने का काम कर रही हैं। नेशनल फुटबॉलर मोनी की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह नदी घाट पर कपड़े धो रही है। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद में प्रैक्टिस को अलविदा नहीं कहा है। सुबह सवेरे वह नियमित तौर पर फुटबॉल की प्रैक्टिस करती हैं। पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज में हरदिया चौक की रहने वाली मोनी नेशनल लेवल चैंपियनशिप खेल चुकी हैं। मोनी साल 2018 में असम के डिब्रूगढ़ में और 2019 में उड़ीसा के कटक में आयोजित नेशनल लेवल चैंपियनशिप में भाग ले चुकी हैं। 


मोनी के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उसके परिवार का पुश्तैनी काम कपड़े धोने का है। पिता भी यही काम करते आ रहे हैं लिहाजा लॉकडाउन में पैदा हुई कठिन परिस्थितियों के बीच मोनी अब अपने पिता का हाथ बता रही है। मोनी का  जज्बा जबरदस्त है लेकिन बिहार में खिलाड़ियों की दुर्दशा वाली यह तस्वीर एक बार फिर हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या किसी अन्य राज्य में भी खिलाड़ियों के साथ ऐसा बर्ताव होता है?

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