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NEET Scam : ‘इंजन’ देता था जवाब, ‘बोगी’ लिखती थी कॉपी! NEET Scam का पूरा सिस्टम बेनकाब; परीक्षा हॉल में इस खेल करवाता था किंगपिन RJD नेता संतोष जायसवाल

NEET फर्जीवाड़े में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने RJD नेता संतोष जायसवाल को गिरफ्तार कर गाजियाबाद के होटल से 20 छात्रों को मुक्त कराया। ‘इंजन-बोगी’ मॉडल से परीक्षा पास कराने का खेल चलता था।

NEET Scam : ‘इंजन’ देता था जवाब, ‘बोगी’ लिखती थी कॉपी! NEET Scam का पूरा सिस्टम बेनकाब; परीक्षा हॉल में इस खेल करवाता था किंगपिन RJD नेता संतोष जायसवाल
Tejpratap
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6 मिनट

NEET Scam : दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आया बिहार का एक ऐसा चेहरा, जो कभी राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब देश के सबसे बड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा घोटालों में कथित ‘किंगपिन’ के तौर पर सामने आया है। NEET फर्जीवाड़े में गिरफ्तार हुए राजद नेता संतोष जायसवाल की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। मोतिहारी के एक साधारण परिवार से निकलकर दिल्ली के आलीशान बंगले तक पहुंचने वाले संतोष पर अब मेडिकल परीक्षा में करोड़ों के खेल का मास्टरमाइंड होने का आरोप है।


दिल्ली पुलिस ने संतोष जायसवाल को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उसकी निशानदेही पर गाजियाबाद के एक होटल से 20 NEET अभ्यर्थियों को मुक्त कराया गया। पुलिस ने मौके से छात्रों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट, ब्लैंक चेक और कई संदिग्ध कागजात भी बरामद किए हैं। इस पूरे मामले में संतोष के साथ तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने NEET परीक्षा में धांधली के एक बेहद संगठित नेटवर्क की तस्वीर सामने रख दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस गिरोह में परीक्षा देने वाले मेधावी सॉल्वर्स को ‘इंजन’ कहा जाता था, जबकि पैसे देकर परीक्षा पास कराने वाले छात्रों को ‘बोगी’ नाम दिया गया था। गिरोह का पूरा खेल इसी ‘इंजन-बोगी मॉडल’ पर चलता था।


बताया जा रहा है कि उम्मीदवारों से एक साथ आवेदन भरवाया जाता था ताकि उनके रोल नंबर लगातार क्रम में आएं। इसके बाद सेंटर पर बैठने की व्यवस्था इस तरह की जाती थी कि सॉल्वर यानी ‘इंजन’ के ठीक पीछे असली कैंडिडेट यानी ‘बोगी’ बैठे। परीक्षा के दौरान सॉल्वर इशारों या धीरे-धीरे बोलकर जवाब बताता था।


दिल्ली पुलिस के मुताबिक परीक्षा से एक रात पहले सभी छात्रों को होटल में रखा जाता था। वहां उन्हें संभावित प्रश्न और उत्तर रटवाए जाते थे। गिरोह दावा करता था कि यही सवाल परीक्षा में आने वाले हैं। अगले दिन गिरोह के लोग खुद सभी छात्रों को परीक्षा केंद्र तक छोड़ने जाते थे। इतना ही नहीं, परीक्षा खत्म होने तक छात्रों के एडमिट कार्ड और ओरिजिनल डॉक्यूमेंट अपने पास रखे जाते थे ताकि कोई मुकर न सके। डील पूरी होने के बाद ही दस्तावेज लौटाए जाते थे।


पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 2 मई को सूरत पुलिस की मदद से दिल्ली पुलिस को NEET परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े की सूचना मिली। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने महिपालपुर इलाके के करीब 100 होटलों में छापेमारी की। शुरुआती कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में संतोष जायसवाल का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे दबोचा और फिर गाजियाबाद के होटल से 20 छात्रों को बरामद किया गया।


संतोष जायसवाल बिहार के मोतिहारी जिले के बसवरिया गांव का रहने वाला है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी। उसके पिता सिनेमा हॉल में ऑपरेटर का काम करते थे, लेकिन तकनीक बदलने और सैटेलाइट सिस्टम आने के बाद उनकी नौकरी चली गई। मोतिहारी में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद संतोष पढ़ाई के लिए पटना आया। यहीं उसकी मुलाकात कथित तौर पर उस दौर के बड़े परीक्षा माफियाओं से हुई और धीरे-धीरे वह इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया।


सूत्र बताते हैं कि बाद में संतोष ने दिल्ली में मेडिसिन का बड़ा कारोबार खड़ा किया। इसी कारोबार की आड़ में उसने अपना नेटवर्क फैलाया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के पॉश इलाके ईस्ट ऑफ कैलाश में उसका आलीशान बंगला है। इसके अलावा कई अन्य संपत्तियों की भी जानकारी सामने आ रही है।


पैसे और रसूख के बाद संतोष की नजर राजनीति पर गई। उसने पहले अपने भाई राजन जायसवाल को 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में ढाका सीट से चुनाव लड़वाया। हालांकि प्लुरल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले उसके भाई की जमानत तक नहीं बच सकी। इसके बाद संतोष खुद राष्ट्रीय जनता दल के करीब पहुंचा और पार्टी की सदस्यता ली। उसे पार्टी में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी मिली।


राजनीति में पकड़ मजबूत करने के लिए उसने रक्सौल विधानसभा क्षेत्र में भी सक्रियता बढ़ाई। 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट पाने के लिए उसने काफी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह दिल्ली में राजद के राष्ट्रीय कार्यालय में सक्रिय हो गया। पार्टी दफ्तर को कवर करने वाले पत्रकार बताते हैं कि संतोष रोजाना दफ्तर में नजर आता था और धीरे-धीरे उसने राजनीतिक गलियारों में भी पहचान बना ली थी।


अब वही संतोष जायसवाल दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क आखिर कितना बड़ा है और इसमें किन-किन राज्यों तक तार जुड़े हुए हैं। वहीं इस गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति और NEET परीक्षा की साख, दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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