MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर में सात करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि की कथित हेराफेरी और आय से अधिक संपत्ति के मामले में तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को विशेष निगरानी अदालत ने दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। सजा के बिंदु पर 26 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी।
सात करोड़ की हेराफेरी मामले में महिला सिपाही को दोषी करार दिया गया। विजिलेंस कोर्ट ने ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया। सुमन कुमार दिवाकर, माननीय विशेष न्यायाधीश (पीठासीन पदाधिकारी), विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा अभियुक्त श्रीमती बेबी कुमारी, तत्कालीन महिला सिपाही-824, मुजफ्फरपुर जिला बल को धारा 467/468/471/409/420/120बी भा०द०वि० एवं धारा 13(1)(5/5) सह पठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-27/2012 (विशेष वाद सं-12/2012) में दोषी ठहराया गया।
यह मामला निगरानी जांच सं०-एफ0-02/2011 के जांचोपरांत समर्पित जांच प्रतिवेदन के आधार पर निगरानी थाना कांड सं0 27/12 दर्ज किया गया। इसका मुख्य आधार मुजफ्फरपुर थाना कांड सं0 401/10 दिनांक 01.10.2010 है, जो वादी पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), मुजफ्फरपुर श्री मनीष कुमार को लिखित आवेदन पर (1) श्री सुशील कुमार चौधरी, तत्कालीन लेखापाल, पुलिस कार्यालय, मुजफ्फरपुर (2) श्रीमती अनीत चौधरी, पति सुशील कुमार चौधरी (3) श्रीमती शकुन्तला देवी, महिला पुलिस एवं अन्य दो संदिग्धों के विरूद्ध षड़यंत्र के तहत् भारी वित्तीय अनियमितता करने एवं सात करोड़ से अधिक सरकारी राशि गबन करने के आरोप में प्रतिवेदित किया गया था।
स्थानीय पुलिस द्वारा अनुसंधान में पाया गया कि वर्ष 2006 से सितम्बर 2010 तक की अवधि में कांड के प्राथमिकी अभियुक्त लेखापाल श्री सुशील चौधरी द्वारा लगभग सात करोड़ रूपये की सरकारी राशि को मुजफ्फरपुर कोषागार के माध्यम से पुलिसकर्मियों के वेतन, टी०ए० तथा अन्य विपत्रों द्वारा अन्य अभियुक्तों की संलिप्तता एवं सहयोग से अपने वेतन खाता सहित बेबी कुमारी, महिला सिपाही के खाता सं०-11082148509 में स्थानांतरण कर जमा कराये, जिसका उपयोग इन्होंने तथा अन्य प्राथमिकी एवं अप्राथमिकी अभियुक्तों ने किया।
स्थानीय पुलिस द्वारा अनुसंधान के क्रम में तीनों अभियुक्तों एवं महिला सिपाही बेबी कुमारी की आवास की तलाशी ली गई एवं तलाशी के क्रम में उनके आवास से भारी नगद राशि, जेवरात तथा परि सम्पत्ति संबंधी कागजात जब्त किए गए। अनुसंधानोपरांत मुजफ्फरपुर पुलिस द्वारा प्राथमिकी एवं अन्य प्राथमिकी अभियुक्त (बबी कुमार, महिला सिपाही) सहित के विरूद्ध आरोप पत्र संख्या 387/10 दिनांक 28.12. 2010 समर्पित किया गया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा लोकसेवक बेबी कुमारी के विरूद्ध प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप की जांच की गई।
जांचोपरांत श्री मदन प्रसाद सिंह, पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्रीमती बेबी कुमारी, तत्कालीन महिला सिपाही-824, मुजफ्फरपुर जिला बल के विरूद्ध 35,42,955/-रूपये के प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में दर्ज किया गया था।
इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता श्री अश्विनी कुमार, वरीय पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया। बिहार सरकार की ओर से श्री कृष्ण देव साह, प्रभारी विशेष लोक अभियोजक, निगरानी, मुजफ्फरपुर ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोषसिद्ध कराने में सफलता हासिल की।
धारा माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्त श्रीमती बेबी देवी को 467/468/471/409/420/120बी भा०द०वि० एवं धारा 13(1)(1/xi) सह पठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 धारा में दोषी पाया गया एवं न्यायिक अभिरक्षा में लिया गया। सजा की बिन्दु पर दिनांक-26.10.2026 को सुनवाई निर्धारित है।
अब तक वर्ष 2026 में कुल 22 भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायालय द्वारा लोक सेवकों को दोषी पाया गया है। वर्तमान कांड में दोषसिद्ध की कार्रवाई श्री सुमन कुमार दिवाकर, माननीय विशेष न्यायाधीश (पीठासीन पदाधिकारी), विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।
वर्ष 2000 से वर्ष 2024 तक (झारखंड राज्य अलग बनने के बाद से) यह सजा की सबसे अधिक कार्रवाई हुई है। उक्त वर्ष 2000 से 2024 तक 25 वर्षों में औसत प्रति वर्ष सजा मात्र 5.6 कांडों में हुई थी, इस प्रकार इस वर्ष 2026 में उक्त औसत से 293% अधिक सजा हुई है।





