MUZAFFARPUR: आस्था की डगर पर भ्रष्टाचार का साया मंडराने लगा है। मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में इन दिनों अमरनाथ यात्रा के लिए अनिवार्य हेल्थ सर्टिफिकेट (CHS) जारी करने के नाम पर अवैध वसूली का बड़ा खेल सामने आया है।
सरकारी व्यवस्था की लाचारी और बिचौलियों की दबंगई का आलम यह है कि जो श्रद्धालु नियम-कायदे से अपनी जांच कराना चाहते हैं, उन्हें हफ्तों अस्पताल के चक्कर कटवाए जा रहे हैं, वहीं महज ₹1000 की 'रिश्वत' देने पर आधे घंटे के भीतर बिना किसी शारीरिक जांच के फिट होने का प्रमाण पत्र थमाया जा रहा है।
बिना जांच के मिल रहा 'फिटनेस' का ठप्पा
अमरनाथ यात्रा जैसी कठिन और जोखिम भरी यात्रा के लिए स्वास्थ्य मानकों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होता है। लेकिन सदर अस्पताल में नियमों को ताक पर रखकर सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं। एक स्टिंग ऑपरेशन और पड़ताल के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अस्पताल परिसर में सक्रिय एक कर्मी ₹1000 लेकर यात्रियों का काम चुटकियों में करवा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में डॉक्टर और मरीज के बीच कोई संवाद तक नहीं होता। बिना ब्लड प्रेशर जांचे, बिना ईसीजी (ECG) किए और बिना किसी फिजिकल स्क्रीनिंग के, मेडिकल ऑफिसर सीधे कागजों पर मुहर और हस्ताक्षर कर रहे हैं। जिस सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिए नियमानुसार लंबी कतार और विस्तृत जांच की जरूरत है, वह पैसे के दम पर अस्पताल की कैंटीन या बरामदे में बैठकर ही उपलब्ध हो जा रहा है।
डॉक्टर की दलील
"काम का दबाव है, इसलिए कर देता हूं साइन:- इस गंभीर अनियमितता के केंद्र में रहे मेडिकल ऑफिसर *डॉ. नवीन चन्द्र नयन* से जब इस संबंध में सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार बिना मरीज को देखे ही वे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं।
"अस्पताल में काम का दबाव बहुत अधिक रहता है। मेरे पास जो भी कागजात लाए जाते हैं, मैं उन पर हस्ताक्षर और मुहर लगा देता हूं। कई बार भीड़ की वजह से यह संभव नहीं हो पाता कि हर मरीज की व्यक्तिगत जांच की जाए- डॉ. नवीन चन्द्र नयन, संबंधित मेडिकल ऑफिसर
डॉक्टर का यह बयान न केवल प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है, बल्कि उन हजारों श्रद्धालुओं की जान को भी जोखिम में डालता है जो अस्वस्थ होने के बावजूद फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर दुर्गम रास्तों पर निकल जाते हैं।
सिविल सर्जन का कड़ा रुख: होगी उच्चस्तरीय जांच: मामला तूल पकड़ते ही जिला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने इस प्रकरण को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने साफ किया है कि मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल के दिनों में जारी किए गए सभी मेडिकल सर्टिफिकेट की दोबारा जांच की जाएगी।
कार्रवाई का आश्वासन
दोषी पाए जाने वाले मेडिकल ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से अमरनाथ यात्रा के मेडिकल पैनल से बाहर किया जाएगा। जांच कमेटी का गठन: एक विशेष टीम यह पता लगाएगी कि बिना जांच के सर्टिफिकेट जारी करने के पीछे कौन-कौन से कर्मी और बिचौलिए शामिल हैं।
श्रद्धालुओं में आक्रोश और सुरक्षा पर सवाल
एक तरफ प्रशासन जांच की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता में भारी रोष है। गरीब और ईमानदार श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें एक छोटे से हस्ताक्षर के लिए हफ्तों दौड़ाया जाता है, जबकि रसूखदार और पैसे वाले लोग व्यवस्था को खरीद रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है। अमरनाथ यात्रा के दौरान ऑक्सीजन की कमी और कठिन चढ़ाई के कारण हर साल कई मौतें होती हैं। ऐसे में बिना जांच के 'फिट' घोषित कर देना, किसी को मौत के मुंह में धकेलने जैसा है। यदि कोई अस्वस्थ व्यक्ति इस 'फर्जी' सर्टिफिकेट के दम पर यात्रा पर जाता है और उसे कुछ अनहोनी होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल का यह मामला स्वास्थ्य विभाग की साख पर एक गहरा धब्बा है। अब देखना यह है कि सिविल सर्जन की घोषणा के बाद क्या वाकई कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर 'जांच' के नाम पर फाइलें दबा दी जाएंगी।




