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बिहार में शराबबंदी लागू करने में पुलिस नाकाम, खुद शराब की दुकानें बंद करवाने का ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा

मुजफ्फरपुर के बलुआहा गांव में ग्रामीणों ने खुद शराब की दुकानों पर धावा बोलकर चुलाई शराब नष्ट की और दुकानें बंद कराईं। पुलिस प्रशासन की नाकामी उजागर।

BIHAR
पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

MUZAFFARPUR: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी को पुलिस प्रशासन भले ही सफल ना बना पाया हो, लेकिन अब समाज ने खुद शराबबंदी को सफल बनाने की कमान संभाल ली है। मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के जारंग पश्चिमी पंचायत के बलुआहा गांव में नज़ारा बिल्कुल अलग दिखा।


यहां पुलिस गांव-टोले में खुलेआम बिक रही चुलाई शराब की दुकानों को बंद कराने में नाकाम रही तब समाज के लोगों ने खुद सामने आकर शराबबंदी को सफल बनाने में लग गये। देसी शराब को नष्ट कर दुकान बंद करा दी। भाजपा नेता राज कुमार सहनी, ग्रामीण सुकन सहनी, विन्देश्वर सहनी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पहले बैठक की फिर तय किया कि अब शराब माफियाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


गुरुवार की सुबह अभियान छेड़ते हुए ग्रामीणों ने सभी चिन्हित दुकानों पर धावा बोला। देसी शराब से भरे गैलन और बोतलें तोड़ दी और दुकानों को ज़बरन बंद करा दिया गया। राज कुमार सहनी ने कहा कि “जब सरकार और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है, तब यह सब देखकर समाज के लोगों को खुद सामने आना पड़ा। यह लड़ाई बलुआहा से शुरू हुई है और बहुत जल्द पूरे गायघाट को शराब मुक्त बना एक मिसाल पेश की जायेगी।” 


इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। जिनके कंधों पर शराबबंदी लागू कराने की जिम्मेदारी है, वही अब अक्षम साबित हो रहे हैं। अब सवाल उठता है कि क्या सरकार की शराबबंदी महज़ कागज़ों पर है? क्या पुलिस की नाकामी को छुपाने के लिए समाज को सड़कों पर ही उतरना पड़ेगा? ग्रामीणों के इस अभियान की चर्चा प्रखंड क्षेत्र में जोरों पर है।

मुजफ्फरपुर से प्रभात की रिपोर्ट