1st Bihar Published by: MANOJ KUMAR Updated Apr 07, 2026, 4:03:36 PM
- फ़ोटो
Bihar News: बिहार में अप्रैल महीने के साथ ही नए शैक्षणिक सत्र का आगाज हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही निजी स्कूलों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मुजफ्फरपुर के विभिन्न क्षेत्रों से अभिभावकों ने स्कूलों पर तानाशाही और आर्थिक शोषण के आरोप लगाए हैं। मुख्य विवाद स्कूलों द्वारा किताबों और कॉपियों की खरीदारी के लिए खास दुकानों को अनिवार्य बनाने को लेकर है।
शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के खिलाफ यह शिकायत आम हो गई है कि वे अभिभावकों को एक सूची थमा देते हैं और मौखिक या लिखित रूप से निर्देश देते हैं कि सामग्री केवल चयनित वेंडर से ही खरीदी जाए। अभिभावकों का कहना है कि इन दुकानों पर किताबें और स्टेशनरी बाजार मूल्य से काफी अधिक दामों पर बेची जा रही हैं। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल प्रशासन और दुकानदारों के बीच अंदरूनी साठगांठ है। हमें खुले बाजार से सस्ती किताबें लेने का विकल्प नहीं दिया जा रहा, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
डीएम सुब्रत कुमार सेन का कड़ा रुख: इस पूरे मामले में जिले के आला अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। DM सुब्रत कुमार सेन ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि किताबों की खरीद के लिए बाजार पूरी तरह खुला है। अभिभावक अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी भी स्कूल द्वारा किसी खास दुकान से खरीदारी करने के लिए दबाव बनाना पूरी तरह अनुचित और नियमों के विरुद्ध है।
डीएम ने साफ किया है कि प्रशासन को मौखिक शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन कार्रवाई के लिए ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अभिभावक किसी विशेष स्कूल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराता है, तो तुरंत जिला स्तर पर एक विशेष टीम गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
जांच में यदि स्कूल प्रशासन दोषी पाया जाता है, तो उनकी मान्यता रद्द करने से लेकर भारी जुर्माना लगाने तक की कार्रवाई की जा सकती है। जिलाधिकारी के इस कड़े तेवर के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि निजी स्कूलों की इस सिंडिकेट वाली कार्यप्रणाली पर लगाम लगेगी और अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।