1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Fri, 16 Jan 2026 05:26:55 PM IST
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Bihar News: निगरानी कोर्ट ने छह भ्रष्ट अधिकारियों को सजा सुनाई है. निगरानी कोर्ट मुजफ्फरपुर ने गन्ना उद्योग विभाग के तत्कालीन प्रशासन प्रमुख समेत छह लोगों को करप्शन केस में सजा सुनाई है.
निगरानी ब्यूरो की तरफ से बताया गया है कि सजा पाने वालों में नंद कुमार सिंह, तत्कालीन प्रशासन प्रमुख, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड पटना, उमेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड पटना, लालबाबू प्रसाद, तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण, बेतिया, सुशील कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण ,अजय कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन लेखा पदाधिकारी, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण और धीरेन्द्र झा, तत्कालीन चीनी बिक्री प्रभारी, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण शामिल हैं.
इन सभी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) एवं भा॰द॰वि॰ की धारा 467, 468, 471, एवं 120(बी॰) के तह्त निगरानी थाना कांड संख्या-07/2000 (विशेष वाद सं-94/2002) में दोषी ठहराया गया है।यह मामला सदन कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर के लिखित प्रतिवेदन के आधार पर बिहार राज्य सूगर कॉपरेशन लिमिटेड, पटना के अतंर्गत लौरिया, प॰ चम्पारण स्थित चीनी मिल में माह सितम्बर 1990 में 997 बोरे चीनी का अपने पद का भ्रष्ट दुरूपयोग, धोखेबाजी एवं जालसाजी कर गबन करने के आरोप में दर्ज कराया गया था।
इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्त्ता पुलिस उपाधीक्षक, कुमार एकले, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा सटीक एवं समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया। बिहार सरकार की ओर से कृष्णदेव साह, प्रभारी विशेष लोक अभियोजक निगरानी, मुजफ्फरपुर ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और सभी 06 (छः) सरकारी पदाधिकारियों को दोषी सिद्ध कराने में सफलता हासिल की।
नंद किशोर सिंह, तत्कालीन प्रशासन प्रमुख, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड पटना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) 1988 के तहत दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा।
उमेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक, बिहार राज्य सूगर कॉपरेशन लिमिटेड पटना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) 1988 के तहत दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा।
लालबाबू प्रसाद, तत्कालीन सूगर कोषांग लिपिक, बिहार राज्य सूगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण, बेतिया, सुशील कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण, अजय कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन लेखा पदाधिकारी, बिहार राज्य सूगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण और धीरेन्द्र झा, तत्कालीन चीनी बिक्री प्रभारी, बिहार राज्य सूगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) 1988 के तहत तीन वर्ष सश्रम कारावास एवं 25,000/-(पच्चीस हजार) रूपये का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा।
वर्ष 2025 में कुल 30 भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी जा चुकी है। जिसमें 28 मामलों में दोषसिद्ध की कार्रवाई विशेष न्यायाधीश मो0 रूस्तम, विशेष न्यायालय निगरानी, पटना द्वारा सुनाई गयी है। पिछले वर्ष 2024 में कुल 18 मामलों में सजा सुनायी गयी थी। इस प्रकार इस वर्ष न्यायालयों द्वारा अधिक मामलों में सजा सुनाए जाने की कार्यवाही की गयी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।