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मुंगेर में गंगा के रौद्र रूप के बीच राहत की खबर, जलस्तर में करीब चार सेंटीमीटर तक की गिरावट; पानी अब भी खतरे के निशान से ऊपर

Bihar Flood: मुंगेर में गंगा के जलस्तर में करीब चार सेंटीमीटर की गिरावट से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से करीब 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से करीब 40 हजार लोग प्रभावित हैं और कई रिहायशी इलाकों में पानी घुस चुका है।

Bihar Flood
© Reporter
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar Flood: मुंगेर में गंगा के रौद्र रूप के बीच अब थोड़ी राहत की खबर सामने आई है। बीती रात से गंगा के जलस्तर में करीब चार सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। गंगा का जलस्तर अब 40.08 मीटर पर पहुंच गया है, लेकिन इसके बावजूद गंगा खतरे के निशान से करीब 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। यही वजह है कि मुंगेर में बाढ़ का संकट अभी भी बेहद गंभीर बना हुआ है। गांव से लेकर शहर तक पानी ही पानी नजर आ रहा है। करीब 40 हजार की आबादी बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर है। 



गंगा का जलस्तर थोड़ा नीचे आया है लेकिन मुंगेर की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। बीती रात से गंगा के जलस्तर में चार सेंटीमीटर की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन नदी अभी भी खतरे के निशान से करीब 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ का पानी अब सिर्फ निचले इलाकों तक सीमित नहीं है बल्कि रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों तक पहुंच चुका है।



मुंगेर सदर और जमालपुर प्रखंड की कई पंचायतों के साथ नगर निगम क्षेत्र की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है। जफरनगर, कुतलूपुर और झौआ बहियार जैसे इलाकों में बाढ़ ने जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। कहीं लोग गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं, तो कहीं घरों की छतें ही लोगों का नया आशियाना बन गई हैं। बाढ़ के पानी ने लोगों के सामने सिर्फ रहने की नहीं बल्कि रोजी-रोजगार और जरूरी कामकाज की भी चुनौती खड़ी कर दी है।लोगों का कहना है कि घरों में पानी घुसने के बाद वे अपने ही इलाके में जलकैदी बनकर रह गए हैं।



उधर बरियारपुर प्रखंड में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। यहां बाढ़ का पानी घरों से लेकर सड़कों और थाना परिसर तक में प्रवेश कर चुका है।अब मुंगेर शहर के रिहायशी इलाके भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। नगर निगम के वार्ड नंबर 40, 41, 42 और 43 के साथ लाल दरवाजा और चंडिका स्थान इलाके में भी कई घर पानी से घिरे हुए हैं।बाढ़ के पानी के बीच सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है, जिनके सामने सुरक्षित ठिकाने के साथ-साथ भोजन, पीने का पानी और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट है।



हालांकि प्रशासन की ओर से राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, सामुदायिक भोजन, मेडिकल कैंप, पेयजल, पॉलीथिन और पशु चारा पहुंचाया जा रहा है। प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि राहत पहुंचाने में किसी भी बाढ़ पीड़ित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।



जिलाधिकारी निखिल धनराज ने कहा है कि बाढ़ की स्थिति गंभीर है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। डीएम से लेकर अंचल स्तर के अधिकारी और कर्मचारी राहत कार्य में जुटे हैं। नावों के जरिए प्रभावित इलाकों तक पहुंच बनाई जा रही है और जरूरत के मुताबिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम भी जारी है।



फिलहाल गंगा के जलस्तर में चार सेंटीमीटर की गिरावट ने जरूर उम्मीद जगाई है लेकिन जब तक नदी खतरे के निशान से काफी नीचे नहीं आती, तब तक मुंगेर पर बाढ़ का खतरा बरकरार रहेगा। अब नजर गंगा के जलस्तर पर है क्योंकि कुछ सेंटीमीटर की गिरावट जहां राहत दे रही है, वहीं हजारों लोगों की जिंदगी अभी भी बाढ़ के पानी के बीच फंसी हुई है।

रिपोर्ट- इम्तियाज खान, मुंगेर

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता