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Land For Job Scam : ''उलटी गंगा बहाने'' जैसा होगा ...', लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में अदालत से झटका, 1600 दस्तावेजों की याचिका खारिज

दिल्ली अदालत ने ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 1,600 अनरिलायड दस्तावेज़ की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा, यह ट्रायल में देरी करने का बहाना है।

 Land For Job Scam : ''उलटी गंगा बहाने'' जैसा होगा ...', लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में अदालत से झटका, 1600 दस्तावेजों की याचिका खारिज
Tejpratap
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Land For Job Scam : देश के चर्चित लैंड फॉर जॉब घोटाला केस (Land For Job Scam Case) में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को दिल्ली की अदालत से बड़ा झटका लगा है। इस मामले में लालू यादव और राबड़ी देवी ने कथित तौर पर अपने बचाव के लिए 1,600 से अधिक 'अनरिलायड' दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। अदालत ने न सिर्फ उनकी याचिका खारिज कर दी, बल्कि इसे ट्रायल में देरी करने का बहाना बताया।


विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों द्वारा मांगे गए दस्तावेज़ अविश्वसनीय हैं और उनका उद्देश्य मुकदमे को उलझाने का प्रतीत होता है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे दस्तावेज़ को एकमुश्त उपलब्ध कराना न केवल न्यायिक प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर देगा, बल्कि इससे मामले में अनावश्यक देरी भी होगी।


अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के 'अनरिलायड' दस्तावेज़ वे सामग्री हैं जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त करती हैं लेकिन अभियोजन पक्ष की शिकायत में उन पर भरोसा नहीं किया जाता। इसलिए, इन दस्तावेज़ों को बचाव पक्ष को प्रदान करना सही नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों को पहले ही इन दस्तावेज़ों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं, जिनका अभियोजन ने इस्तेमाल नहीं किया।


लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के अलावा, अदालत ने दो अन्य आरोपियों की याचिकाओं को भी खारिज किया। इनमें लालू के निजी सचिव आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर शामिल हैं। महाजन ने एक, जबकि कपूर ने 23 दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।


सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के अनुसार, यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेल के पश्चिम मध्य जोन में चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख के परिवार और सहयोगियों को भूखंड दिए गए।


यह मामला 18 मई 2022 को दर्ज किया गया था। अदालत ने अपने 35 पृष्ठ के आदेश में कहा कि मुकदमे पर से अदालत का वैधानिक नियंत्रण आरोपियों की जिरह की आड़ में नहीं छीना जा सकता। न्यायाधीश ने यह भी नोट किया कि आरोपियों का गुप्त इरादा कार्यवाही को लंबा खींचने का प्रतीत होता है।


अदालत ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और कार्यवाही का शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप साक्ष्यों को दर्ज करना आवश्यक है। आरोपियों की यह याचिका अस्वीकार्य है क्योंकि इसमें बचाव की तैयारी से पहले सभी या कुछ ‘अनरिलायड’ दस्तावेज़ उपलब्ध कराने की शर्त रखी गई थी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर आरोपियों को कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।


इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत इस महत्वपूर्ण घोटाले के मामले में तेजी से सुनवाई और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के पक्ष में है। अब इस केस में आगे की कार्यवाही अदालत के निर्देशों और वैधानिक नियमों के अनुसार जारी रहेगी।