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BIHAR NEWS: फैसल खान उर्फ खान सर ने दहशत फैलने के लिए कार्रवाई थी फायरिंग: पुलिस डायरी से बड़ा खुलासा, आत्मरक्षा में गोली चलवाने की बात गलत

मुसल्लहपुर हाट फायरिंग मामले में पुलिस केस डायरी ने खान सर के आत्मरक्षा के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मारपीट और फायरिंग के बीच करीब 20 मिनट का अंतर था, जिससे यह आशंका जताई गई है कि गोलीबारी दहशत फैलाने के उद्देश्य से की गई

Khan sir
Khan sir
© File photo
Tejpratap
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4 मिनट

PATNA: पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में 2 जून की रात खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग सेंटर पर हुए विवाद और फायरिंग के मामले में पुलिस की केस डायरी ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। फैसल खान उर्फ खान सर ने दावा किया था कि उसने आत्मरक्षा के लिए अपने बॉडीगार्ड से फायरिंग कराई थी, लेकिन अब पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज तथ्य उससे पूरी तरह अलग कहानी बयां कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार फायरिंग दहशत फैलाने के उद्देश्य से की गई थी, न कि तत्काल खतरे से बचने के लिए।


पुलिस डायरी में खुली पोल

पुलिस डायरी के मुताबिक, 2 जून की रात करीब 10:10 बजे मुसल्लहपुर हाट में मारपीट और तोड़फोड़ की घटना हुई। लगभग 20 मिनट बाद, यानी 10:30 बजे फायरिंग हुई। पुलिस का कहना है कि यदि फायरिंग वास्तव में आत्मरक्षा में की गई होती तो दोनों घटनाएं लगभग एक साथ होतीं। इस समय अंतर ने आत्मरक्षा के दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


खान के निजी बॉडीगार्ड्स ने की थी फायरिंग

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर के दोनों निजी बॉडीगार्ड्स प्रदीप कुमार और तालेवर सिंह ने गोलियां चलाई थीं। शुरुआती बयानों में फायरिंग का जिक्र नहीं था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के सामने आने के बाद बॉडीगार्ड्स की भूमिका स्वीकार की गई।


खान ने एफआईआर में फायरिंग का उल्लेख नहीं किया

2 जून को हुई घटना के बाद फैसल खान और उसके सहयोगियों द्वारा दर्ज कराए गए प्रारंभिक केस में गोलीबारी का कोई जिक्र नहीं था। बाद में जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर फायरिंग को केस डायरी में शामिल किया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये तथ्य आत्मरक्षा के दावे को काफी कमजोर करते हैं।


कानूनी विशेषज्ञों की रायकानूनी जानकारों के अनुसार, भारतीय कानून में आत्मरक्षा का अधिकार केवल तत्काल और वास्तविक खतरे की स्थिति में मान्य है। यदि फायरिंग के समय खतरा टल चुका था या केवल आशंका के आधार पर हथियार इस्तेमाल किया गया, तो यह बचाव का आधार कमजोर पड़ सकता है। आरोपियों को अदालत में साबित करना होता है कि परिस्थितियां इतनी गंभीर थीं कि फायरिंग जरूरी थी।


रोशन आनंद कोर्ट में करेंगे मुकदमा

मामले में एक और नया विवाद जुड़ गया है। ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रोशन आनंद ने आरोप लगाया है कि उनके भाई प्रिंस यादव की हत्या नेपाल के विराटनगर में एक साजिश के तहत कराई गई। उन्होंने खान सर और कोल्ड स्टोरेज व्यवसायी डॉ. आरएस प्रसाद समेत अन्य लोगों पर अपने भाई की हत्या करवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। रोशन आनंद का दावा है कि जेल में रहते हुए भी उनके और परिवार पर हमले की कोशिश की गई। रोशन आनंद ने पुलिस से FIR दर्ज करने की गुहार लगाई थी, लेकिन पटना पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया. रोशन आनंद के वकील ने बताया कि शुक्रवार को इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया जाएगा।


पुलिस जांच की दिशा

पुलिस अब इन बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है। वह फायरिंग के समय सभी पक्षों की लोकेशन, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), सीसीटीवी फुटेज का विस्तृत विश्लेषण, घटना से पहले और बाद की गतिविधियां, हथियारों के लाइसेंस और उपयोग के रिकॉर्ड और गवाहों के बयान की पड़ताल कर रही है.0जांच एजेंसियां यह तय करने की कोशिश कर रही हैं कि फायरिंग पूर्व नियोजित थी या परिस्थितिजन्य प्रतिक्रिया।


अदालती में है मामला

दरअसल पटना सिविल कोर्ट ने मामले में पुलिस से केस डायरी तलब की है। खान सर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक बनी हुई है, लेकिन केस डायरी और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। बॉडीगार्ड्स की जमानत याचिका पर भी सुनवाई जारी है।