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Bihar News: प्रसव के बाद मौत का सफर… एम्बुलेंस नहीं मिली तो ऑटो बना सहारा, रास्ते में ही थम गई जिंदगी

बिहार के कैमूर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो खुशी से मातम में बदल गई। सुरक्षित प्रसव के कुछ ही देर बाद एक महिला की हालत बिगड़ी, लेकिन समय पर मदद नहीं मिल पाई… और रास्ते में ही उसकी जिंदगी खत्म हो गई।

Bihar News: प्रसव के बाद मौत का सफर… एम्बुलेंस नहीं मिली तो ऑटो बना सहारा, रास्ते में ही थम गई जिंदगी
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

Bihar News: बिहार के कैमूर जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और सिस्टम दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहनिया अनुमंडल अस्पताल में एक महिला ने सुरक्षित प्रसव तो कर लिया, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और समय पर इलाज न मिलने के कारण उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।


मिली जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए मोहनिया अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की देखरेख में उसका प्रसव सफलतापूर्वक हुआ, जिससे परिवार ने राहत की सांस ली। लेकिन खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। प्रसव के कुछ समय बाद ही महिला को तेज ब्लीडिंग शुरू हो गई, जिससे उसकी स्थिति गंभीर हो गई।


स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उसे तुरंत वाराणसी रेफर कर दिया। यहीं से परिजनों की परेशानी और संघर्ष की असली शुरुआत हुई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इस आपात स्थिति में भी एम्बुलेंस उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती। परिजन बार-बार अस्पताल कर्मियों से गुहार लगाते रहे कि किसी नजदीकी बड़े अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस दे दी जाए, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।


ग्रामीण जीवन कुमार के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि एम्बुलेंस केवल वाराणसी के लिए ही दी जा सकती है और अन्य किसी विकल्प पर ध्यान नहीं दिया गया। इस बीच महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और समय तेजी से निकलता जा रहा था।


मजबूरी में परिजनों ने महिला को एक सीएनजी ऑटो में लिटाया और वाराणसी के लिए निकल पड़े। यह सफर उम्मीद से ज्यादा दर्दनाक साबित हुआ। रास्ते में टोल प्लाजा के पास महिला की हालत और बिगड़ गई और आखिरकार उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।


इस घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती या अस्पताल प्रशासन थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाता, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है।