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फोन पर अफसर बनकर खेल रहे शातिर ठग, मानदेय के नाम पर लोगों से ठगी... बिहार में साइबर अपराधियों का आतंक

Cyber Crime News: बिहार में पंचायत चुनाव से पहले साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं और जनप्रतिनिधियों को मानदेय के नाम पर फर्जी कॉल कर बैंक डिटेल और ओटीपी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। कटिहार समेत कई इलाकों में ऐसे मामले सामने आने के बाद पुलिस अलर्ट हो गई ह

फोन पर अफसर बनकर खेल रहे शातिर ठग, मानदेय के नाम पर लोगों से ठगी... बिहार में साइबर अपराधियों का आतंक
Ramakant kumar
4 मिनट

Cyber Crime News: बिहार में आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच साइबर अपराधियों ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। कटिहार जिले के अलग-अलग प्रखंडों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों को फर्जी कॉल और संदेश के जरिए ठगने की कोशिश की जा रही है। यह गिरोह खुद को सरकारी अधिकारी या विभागीय कर्मचारी बताकर मानदेय भुगतान का लालच देता है और इसी बहाने महत्वपूर्ण बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है।


मानदेय का लालच बन रहा जाल

जानकारी के अनुसार, साइबर ठग खासतौर पर मुखिया, वार्ड सदस्य और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों को निशाना बना रहे हैं। उन्हें फोन कर बताया जाता है कि उनका बकाया मानदेय सरकार की ओर से जारी हो चुका है और जल्द ही उनके खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के नाम पर उनसे बैंक खाता संख्या, आधार नंबर और मोबाइल पर आने वाला ओटीपी मांगा जाता है।


कुछ मामलों में अपराधी व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए फर्जी लिंक भी भेजते हैं। इन लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जिससे निजी डेटा और बैंकिंग जानकारी चुराई जा सकती है।


कुछ ही मिनटों में खाली हो सकता है खाता

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे लिंक बेहद खतरनाक होते हैं। यह मोबाइल में घुसकर यूजर की निजी जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद अपराधी बहुत कम समय में बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं। यही वजह है कि इस तरह के मामलों को गंभीर साइबर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।


संगठित गिरोह की आशंका

मामले को लेकर कटिहार के साइबर थानाध्यक्ष सह यातायात डीएसपी सद्दाम हुसैन ने बताया कि चुनावी माहौल का फायदा उठाकर जनप्रतिनिधियों को टारगेट किया जा रहा है। शुरुआती जांच में यह किसी संगठित गिरोह की गतिविधि प्रतीत हो रही है। आशंका है कि अपराधियों के पास पहले से जनप्रतिनिधियों का डेटा मौजूद है, जिसके आधार पर उन्हें कॉल किए जा रहे हैं।

पुलिस संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान कर रही है और तकनीकी साक्ष्य जुटाने का काम जारी है।


प्रशासन की स्पष्ट चेतावनी


प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी सरकारी योजना या मानदेय भुगतान के लिए फोन पर व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी नहीं मांगा जाता। सभी भुगतान निर्धारित और आधिकारिक प्रक्रियाओं के तहत ही किए जाते हैं। ऐसे में कोई भी कॉल या संदेश जो इस तरह की जानकारी मांगता है, पूरी तरह फर्जी है।


जनप्रतिनिधियों से सतर्क रहने की अपील

पुलिस और प्रशासन ने सभी जनप्रतिनिधियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। अनजान नंबर से आए कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें। किसी के साथ अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें।


यदि कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज प्राप्त होता है, तो तुरंत नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।